बांदा। शहरी क्षेत्रों में अब नए राशनकार्ड नहीं बनेंगे। इसकी वजह बताई गई है कि कुल जनसंख्या में 64 फीसदी राशन कार्ड बनाए जाते हैं। यह मानक यहां पूरा हो चुका है। लॉकडाउन में जिले के शहर सहित ग्रामीण अंचलों में नए राशनकार्डों के 12 हजार आवेदन किए गए थे।
सत्यापन के बाद 9091 राशनकार्ड बनाए गए हैं। 2909 आवेदन सत्यापन के लिए लंबित हैं। अब जनपद में अंत्योदय के 48352 और पात्र गृहस्थी के 3,76,714 राशनकार्ड हैं। पहले इनकी संख्या 3,67,623 थी।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में अंत्योदय सहित 44,739 पात्र गृहस्थी के राशनकार्ड थे। लॉकडाउन के बाद नए राशनकार्डो के लिए 3 हजार आवेदन हुए। इनमें सत्यापन के बाद 1721 राशनकार्ड बना दिए गए। अब इनकी संख्या 45540 हो गई। 1279 आवेदन सत्यापन के लिए अभी लंबित हैं।
ग्रामीण अंचलों में अंत्योदय सहित 3,22, 884 पात्र गृहस्थी के राशनकार्ड थे। नए राशनकार्डों के लिए 9 हजार आवेदन हुए। सत्यापन के बाद 7,379 राशनकार्ड बनाए गए। अब इनकी संख्या 3,30,254 हो गई। 1630 आवेदन सत्यापन के लिए लंबित हैं।
जिलापूर्ति अधिकारी राजीव तिवारी का कहना है कि शहरी क्षेत्रों का आबादी के हिसाब से 64 फीसदी राशनकार्ड होने का सरकारी मानक है। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर यह मानक पूरा हो गया है। अब कोई नया राशनकार्ड नहीं बनेगा। ग्रामीण अंचलों में आबादी के हिसाब से राशनकार्डो की संख्या 43 फीसदी है। अब ग्रामीण अंचलों के ही राशनकार्ड बनाए जाएंगे।