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केंद्र व्यवस्थापक पद से हटाना प्रधानाचार्यों का अपमान : शिक्षक विधायक

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शिक्षक विधायक सुरेश कुमार त्रिपाठी। - फोटो : BANDA
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बांदा। स्ववित्त पोषित (वित्तविहीन) कालेजों के प्रधानाचार्यों को उनके कालेज में परीक्षा केंद्र व्यवस्थापक पद से हटाने के सरकारी फरमान पर शिक्षक नेता भड़क उठे हैं। विधान परिषद में शिक्षक दल नेता सुरेश कुमार त्रिपाठी (एमएलसी) ने इसे प्रधानाचार्यों को अपमानित करने वाला फैसला बताया है। कहा है कि विधान परिषद में वह इसका प्रमुखता से विरोध करेंगे।
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सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में शिक्षक विधायक त्रिपाठी ने कहा कि मौजूदा बोर्ड परीक्षा में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को अपमानित करने वाले आदेश और निर्देश सरकार आए दिन जारी कर रही है। यह दुखद और अपमानजनक है।
कहा कि 3 अप्रैल को शासन ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को आदेश भेजा है कि स्ववित्त पोषित (वित्तविहीन) विद्यालयों में कार्यरत उसी विद्यालय के प्रधानाचार्यों को केंद्र व्यवस्थापक पद से हटा दिया जाए। विधायक ने कहा कि इस दुर्भावनापूर्ण आदेश में पूरे वर्ग पर अविश्वास जताकर अपमान किया गया है।
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पूरे वर्ष शिक्षा और अच्छी व्यवस्था देने वाले प्रधानाचार्य बोर्ड परीक्षा में अक्षम कैसे हो गए? सरकार का यह आदेश संपूर्ण शिक्षा जगत को अपमानित करने वाला और निंदनीय है। विधायक ने कहा कि वह इस बारे में प्रदेश के शिक्षा मंत्री से बात कर अनुरोध करेंगे कि इस आदेश को वापस लिया जाए। प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा का एक बड़ा भाग वित्त पोषित विद्यालय संभाले हुए है। उन्हीं पर अविश्वास किया जाना दुखद है। विधानमंडल के अगले सत्र में भी इस प्रकरण को सदन में उठाया जाएगा।
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