चित्रकूट । गर्मी आते ही किसान पकी फसल काटकर मडाई की तैयारी करने लगता है और इसी सीजन में आग की घटनाएं बढ़ती हैं। खासकर हाईटेंशन लाइन से निकली चिंगारी व जलती बीड़ी सिगरेट फेंकने से फसलों पर आग लग जाती है। इसके लिए जिले का अग्निशमन दल पूरी तरह खुद को तैयार बताता है। लेकिन अग्निशमन विभाग के अधिकारी मानते हैं कि संसाधन व स्टाफ की कमी से विभाग जूझ रहा है। बहुमंजिला इमारत व घनी बस्ती में आग लगने पर उस पर काबू पाना उनके लिए चुनौती होगी।
जिले में सैकड़ों स्थान ऐसे हैं, जहां खेत व खलिहान के बीच से हाईटेंशन लाइन या इससे अधिक क्षमता की विद्युत लाइनें निकली हैं। भीषण गर्मी में पिछले वर्ष मार्च से जून माह तक 300 स्थानों पर आग लगी। इसमें हाईटेंशन लाइन से निकली चिंगारी से लगभग 180 खेत व खलिहानों में आग लगने से फसलें राख हो गई थीं। गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। खेतों में चना, मसूर व गेहूं की फसल लहलहा रही है।
ऐसे में अग्निशमन विभाग के सामने अग्निकांडों से निपटना लोहे के चने चबाने जैसा है। चार तहसील व पांच ब्लाक की आबादी दस लाख है। मुख्यालय से जनपद की सीमा 60 किलोमीटर है। इतनी बड़ी आबादी व क्षेत्रफल में लगने वाली आग को बुझाने के लिए विभाग के पास छोटे-बड़े सात फयर टैंकर व चार पंप हैं, लेकिन इन्हें चलाने वाले कर्मी नहीं हैं। चार ड्राइवर व 22 सिपाही ही कार्यरत हैं। चारों तहसीलों में मोटर फायर गाड़ियां हैं।
इनसेट
स्टाफ बढ़ाए जाने की मांग
चित्रकूट। राजापुर, मऊ व मानिकपुर में फायर स्टेशन बनकर तैयार हैं। यहां पर तीन स्टाफ कर्मी हैं। विभाग ने सरकार से स्टाफ कर्मी बढ़ाए जाने की मांग की है। ऐसे में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
वर्जन
गर्मी से सीमित संसाधन व स्टाफ की कमी भले ही हो लेकिन अग्निकांडों से निपटने की तैयारी पूरी है। राजापुर, मऊ, मानिकपुर व पहाड़ी में चारों जगहों पर फायर टैंकर अग्निकांड से निपटने के लिए तैयार हैं। किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि फसलों को बिजली की तार के नीचे न रखें। आग लगने की सूचना तत्काल यूपी 112 को दें। आग लगने पर आसपास पानी का इंतजाम भी करें। -सतीश कुमार, अग्निशमन अधिकारी, चित्रकूट