नोमानी के अनुसार बांदा होकर गुजरने वाली सामान्य ट्रेनों में एसी थर्ड क्लास का किराया लगभग आधा है, जहां यात्री भारी वेटिंग के बावजूद टिकट लेने को मजबूर हैं। इसके मुकाबले वंदे भारत का चेयर कार किराया 1130 रुपये दोगुना से भी अधिक है। जिसकी वजह से 390 से ज्यादा सीटें खाली पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि खजुराहो जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल तक आसान और तेज यात्रा का इरादा सराहनीय है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ऊंचा किराया यात्रियों को दूर धकेल रहा है। पर्यटक और व्यापारी भी वंदे भारत की जगह पुरानी ट्रेनों जैसे सरसा, अहमदाबाद एक्सप्रेस को चुन रहे हैं।
एएस नोमानी ने कहा कि यदि किराया थोड़ा कम किया जाए तो ट्रेन आसानी से भर सकती है और आधुनिक सुविधाओं का लाभ आम जनता तक पहुंच सकेगा। उन्होंने रेलवे से जनहित में किराये पर पुनर्विचार करने की मांग की है, ताकि आधुनिकता और किफायत का संतुलन बन सके और बुंदेलखंड की गरीब जनता भी वंदे भारत का लाभ उठा सके।