बांदा। ट्रेन में हैंड पर्स चोरी होने के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम के दिए फैसले पर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग, नई दिल्ली ने भी मुहर लगा दी है। आयोग ने उत्तर मध्य रेलवे की अपील खारिज कर दी। अब रेलवे को 35 हजार रुपये उपभोक्ता को अदा करने होंगे। रेलवे ने यह राशि जिला फोरम में जमा कर दी है।
सिविल लाइन निवासी रंजन कुमार पुत्र बांके बिहारी ने जिला उपभोक्ता फोरम में 16 अगस्त 2008 को परिवाद दाखिल किया था कि वह और उनके तीन साथी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से निजामुद्दीन से बांदा आ रहे थे। उनके साथ की अंजू रंजन और एक अन्य का हैंड पर्स चोरी हो गया।
रंजन कुमार के अधिवक्ता दिलीप सिन्हा द्वारा दायर वाद में इसे रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में कमी बताया गया। उपभोक्ता फोरम ने 30 मई 2013 को आदेश दिया कि रेलवे चोरी गए सामान की क्षतिपूर्ति 26 हजार रुपये, मानसिक कष्ट पीड़ा की क्षतिपूर्ति 7000 रुपये और मुकदमा खर्च 2000 रुपये (कुल 35 हजार रुपये) एक माह के अंदर वादी को अदा करे।
जिला उपभोक्ता फोरम के इस आदेश के विरुद्ध उत्तर मध्य रेलवे ने राज्य उपभोक्ता आयोग लखनऊ में अपील दायर की। राज्य आयोग ने पहले तो इस आदेश पर रोक लगा दी और बाद में 30 दिसंबर 2014 को अपने विस्तृत आदेश में जिला फोरम के आदेश को बहाल कर दिया। इस पर उत्तर मध्य रेलवे ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में रिट दायर की। राष्ट्रीय आयोग ने इसे निरस्त कर दिया।
शुक्रवार को जिला उपभोक्ता फोरम पीठ अध्यक्ष रामकैलाश और शैलेंद्र उत्तम ने अपने आदेश में कहा है कि रिट दायर करने वाले (डिग्रीदार) फोरम में अर्जी देकर यहां जमा 35 हजार रुपये ले सकता है। अतिरिक्त राशि रेलवे भी अर्जी देकर वापस ले सकता है।