पहले कमीशन का रेट तय करिए फिर योजना का लाभार्थी बनिए। कृषि विभाग में कुछ ऐसा ही चल रहा है। आवेदन जमा करने आ रहे कई किसानों ने यह बात कही।
डीजल की महंगाई और बिजली कटौती की वजह से खेती की बढ़ रही लागत के मद्देनजर शासन ने ‘सोलर फोटोवोल्टिक इरीगेशन पंप’ योजना लागू की है। जिले में 3000 वाट (3 एचपी) के 10 सोलर पंप और 4800 वाट (5 एचपी) के दो सोलर पंप लगाए जाने हैं।
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ किसानों तक पहुंचने से पहले ही ‘बाबू’ खेल कर रहे हैं। आवेदन जमा करने मवई, जौरही, कटरा कालिंजर, जसपुरा से आए कई किसानों ने बताया कि चयन के नाम पर उनसे पहले कमीशन जमा करने को कहा जा रहा है।
गौरतलब है कि 3 एचपी सोलर पंप पर आने वाली लागत में 75 फीसदी अनुदान लाभार्थी किसान को मिलना है। इसमें 45 फीसदी राज्य सरकार और 30 फीसदी अनुदान केंद्र सरकार देगी जबकि 25 फीसदी खुद कृषक को लगाना होगा। 5 एचपी में 20 फीसदी राज्य सरकार और 30 फीसदी केंद्र सरकार अनुदान देगी।
50 फीसदी लाभार्थी कृषक को खुद लगाना होगा। 3 एचपी पंप की कुल लागत 5.70 लाख रुपये है। इसमें से 2,56,500 रुपये राज्य और 1,71,000 रुपये केंद्र सरकार छूट देगी। 1,42,000 रुपये किसान को जमा करना है। 5 एचपी में 1,82,400 रुपये राज्य और 2,73,600 रुपये केंद्र का अनुदान है। 50 फीसदी यानी 4,56,000 रुपये कृषक को लगाना होगा।
सभी विकास खंडों में 3 एचपी के एक-एक सोलर पंप लघु सीमांत किसान लगाएंगे। विकास खंड नरैनी तथा बबेरू में एक-एक सोलर पंप अल्पसंख्यक लघु सीमांत किसानों को दिए जाने हैं। 5 एचपी के एक-एक सोलर पंप विकास खंड बड़ोखर खुर्द व महुआ में लगाए जाने हैं।
उप कृषि निदेशक उमेशचंद कटियार ने बताया कि सोलर पंप में कमीशन जैसे आरोप गलत हैं। ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर शिकायत मिलेगी तो जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान किसी को भी कमीशन के नाम पर धेला न दे। कोई मांगे तो उन्हें सूचित करें।