बांदा। शहर को केन नदी की बाढ़ से बचाने के लिए तटबंध तो बना दिया गया, लेकिन पंप हाउस अभी तक नहीं बन पाया है। शहर से बारिश का पानी निकालने के लिए अभी भी कामचलाऊ व्यवस्था है। इस कारण अधिक बारिश होने से कई इलाकों के डूबने का खतरा बन जाता है। इसके अलावा तटबंध के रखरखाव पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे यह जर्जर होता जा रहा है।
बसपा सरकार में सिंचाई मंत्री रहे बांदा के बाशिंदे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने तटबंध स्वीकृत और निर्मित करवाया था। लगभग दो किलोमीटर लंबे तटबंध में बोल्डर (पत्थर) लगाए गए हैं। तटबंध पर कच्ची सड़क बनी है। तटबंध में शहर का पानी नदी में डालने के लिए पंप हाउस भी बनना था, लेकिन यह अभी तक नहीं बन पाया। बसपा सरकार जाने के बाद इसकी किसी ने सुध नहीं ली।
आरटीआई कार्यकर्ता कुलदीप शुक्ला को आरटीआई के तहत सिंचाई प्रखंड तृतीय अधिशासी अभियंता ने दी सूचना में बताया है कि तटबंध बांदा शहर को बाढ़ से बचाने में सक्षम है। डाउन स्ट्रीम में एकत्रित बारिश का पानी निकालने के लिए पंप की व्यवस्था है। अधिशासी अभियंता ने यह भी बताया कि पंप हाउस निर्मित न होने से दो पंप स्टोर में रखे हैं। इनमें से एक खराब हो चुका है। पंप की क्षमता 43.9 बीएचपी है।
अधिशासी अभियंता ने बताया है कि वित्तीय वर्ष 2013-14 में 10 लाख और वर्ष 2014-15 में 20 लाख रुपये आवंटित हुए थे। तटबंध की देखरेख के लिए सहायक अभियंता, अवर अभियंता और दो बेलदार नियुक्त हैं। दावा किया है कि तटबंध सुचारु रूप से चल रहा है। शहर का पानी गेटों के माध्यम से नदी में जा रहा है।
तटबंध ने बचाई बाढ़ की तबाही
आरटीआई कार्यकर्ता कुलदीप शुक्ला ने कहा कि तटबंध निर्माण के पहले अक्सर केन नदी की बाढ़ बांदा शहर के कई मोहल्लों में तबाही मचाती थी।
करोड़ों रुपये का नुकसान होता था। बसपा सरकार में तटबंध बनने से शहर को बड़ी राहत मिली, लेकिन अन्य सरकारों ने इसे तवज्जो नहीं दी। पंप हाउस अधूरा पड़ा है। साथ ही तटबंध जगह-जगह ध्वस्त या क्षतिग्रस्त हो गया है। इसकी मरम्मत भी नहीं कराई जा रही। जनप्रतिनिधि भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
Pump house not built in embankment of Cane River- फोटो : BANDA