अधिवक्ता संघ से लेकर आम लोगों का चल रहा विरोध धरा रहा गया। संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) अंतत: शहर से दूर प्राइवेट मकान में स्थानांतरित कर दिया गया। शनिवार को छुट्टी के दिन फाइलें ट्रकों पर भरकर ले जाई गईं।
तमाम कागज बिखर भी गए। लंबे अरसे से आरटीओ सिविल लाइन स्थित एक प्राइवेट मकान में चल रहा था। इधर, कुछ दिनों से इसे शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर बबेरू रोड में पल्हरी गांव के पास सुनसान स्थल में ले जाने की कवायद शुरू हो गई थीं।
यह भनक पाकर अधिवक्ता संघ समेत तमाम संगठनों और वाहन स्वामियों ने इसका विरोध भी किया। प्रदर्शन हुए और ज्ञापन भी दिए गए पर नतीजा सिफर रहा।
शनिवार को छुट्टी का दिन था। सुबह से ही आरटीओ कार्यालय में ट्रक खड़े कर दिए गए। मजदूरों और कर्मचारियों से ट्रक पर दफ्तर की फाइलें लदाई जाने लगी। काम दिन भर चला। फाइलों को ट्रक में डालते समय तमाम वाहनों के अभिलेख इधर-उधर बिखर गए।
उधर, भाजपा युवा मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य संतोष अवस्थी ने डीएम को ज्ञापन देकर कहा कि भवन में परिवहन कार्यालय शिफ्ट किया जा रहा है। वह विवादित है। उसका मुकदमा चल रहा है। साथ ही किराया भी मौजूदा भवन से चार गुना ज्यादा है। मांग की कि सुविधा, सुरक्षा और शासकीय धन की बर्बादी रोकने के लिए परिवहन कार्यालय शहर में ही रखा जाए।