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Banda News: परियोजना में पेंच, नहर के रास्ते पर तहसील भवन

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फोटो - 02 लिंक परियोजना स्थल पर केन नदी।
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फोटो - 03 प्रस्तावित डोढन बांध स्थल के करीब लगा बोर्ड। सोशल मीडिया
- केन-बेतवा लिंक में खत्म नहीं हो रहीं अड़चनें
- लेट लतीफी से 3500 करोड़ बढ़ गई लागत

संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। दो दशक पहले तैयार हुई केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण केन-बेतवा लिंक परियोजना में अड़चनों का सिलसिला खत्म नहीं हो रहा। इस लेटलतीफी में परियोजना की लागत लगभग 3500 करोड़ रुपये बढ़ गई है।
17 वर्षों तक यूपी और एमपी के बीच परियोजना को लेकर सहमति नहीं बन पाई। बमुश्किल दिसंबर 2024 में झांसी आकर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने परियोजना का शिलान्यास किया। लेकिन अब झांसी में ही रोड़ा अटक गया है। यहां लिंक नहर के रास्ते में राजस्व विभाग के दफ्तर की बिल्डिंग आड़े आ रही है। अलबत्ता एमपी और चित्रकूटधाम मंडल में कई स्थानों पर परियोजना का काम शुरू हो गया है।
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अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में देश की 37 नदियों को आपस में जोड़ने की योजना बनी थी। केन और बेतवा नदियों को जोड़ना भी इसमें शामिल था। योजना की शुरुआत इन्हीं दोनों नदियों से हुई है। शुरूआत में हुए आंकलन के मुताबिक सभी 37 नदियों को जोड़ने की कुल अनुमानित लागत पांच लाख 60 हजार करोड़ बताई बताई गई थी। इसमें केन - बेतवा परियोजना की अनुमानित लागत 44 हजार 605 करोड़ थी। वर्ष 2024 में केंद्र सरकार के बजट में इतनी ही लागत बताई गई थी।
केन को बेतवा नदी से जोड़ने के लिए 221 किमी लंबी पक्की नहर बनाई जानी है। मध्य प्रदेश के डोढन बांध से बेतवा (झांसी) तक प्रस्तावित नहर के लिए अब झांसी में पेंच फंस गया है। यहां निवाड़ी कस्बे से होकर नहर निकलनी है। लेकिन इस मार्ग पर निवाड़ी तहसील कार्यालय का भवन पड़ रहा है। सिंचाई विभाग का कहना है कि जब प्रोजेक्ट बनाया गया था तब यह तहसील कार्यालय भवन नहीं बना था। इसके आसपास भी नहर के लिए पर्याप्त जगह (भूमि) नहीं है। नतीजे में एक साल से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी यह अड़चन दूर नहीं हो पाई है। नहर का काम रुका पड़ा है। हालांकि सिंचाई विभाग विकल्प की तलाश में लगा हुआ है।

इनसेट -
केन नदी का कमांड क्षेत्र 19,633 वर्ग किलोमीटर है। इसका करीब 98 फीसदी हिस्सा एमपी में है। लिंक परियोजना का ज्यादातर फायदा और खामियाजा भी एमपी के ही खाते में जाएगा। एमपी में 8,10,827 हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। जबकि यूपी में सिर्फ 2.51 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेंगी।
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वर्जन

मुख्य अभियंता (सिंचाई) झांसी देवेश शुक्ला का कहना है कि नहर मार्ग के लिए प्रयास चल रहा है। अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। चालू वर्ष में यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
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