बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के इकलौते राजकीय मेडिकल कालेज की जनरल ओपीडी (वाह्य रोगी विभाग) और आईपीडी (आकस्मिक रोगी विभाग) जिले में कोरोना के बढ़ते केसों को देखते हुए बंद कर दी गई है। यहां सिर्फ गंभीर मरीजों और कोरोना संदिग्ध मरीजों का ही इलाज होगा। दूसरी लहर में बेकाबू हो रहे कोरोना को लेकर यह निर्णय लिया गया है। उधर, मेडिकल कॉलेज में कोरोना के गंभीर मरीजों के भर्ती होने की संख्या तेजी से बढ़ी है।
मेडिकल कालेज प्रशासन का दावा है कि कोरोना संक्रमितों को भर्ती किए जाने के लिए पर्याप्त 400 बेड हैं। इनमें गंभीर संक्रमितों के लिए 80 बेड की हाई डिपेंडेंसी यूनिट है। मंडल के चारों जनपदों से 152 कोरोना मरीज मेडिकल कालेज में भर्ती हैं। इनमें 12 संक्रमित आईसीयू में स्वस्थ होने की जंग लड़ रहे हैं। बांदा मेडिकल कालेज में माह पूर्व ही जनरल ओपीडी बहाल हुई थी। नॉन कोविड अस्पताल में इलाज कराने के लिए साधारण रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी थी। रोजाना यहां पांच सौ से ज्यादा मरीज ओपीडी में आने लगे थे। पहली लहर और लॉकडाउन के बाद सारी व्यवस्था पटरी पर आने लगी थी कि अब कोरोना की दूसरी लहर ने पाबंदियां लगा दीं। नतीजे में मेडिकल कालेज की जनरल ओपीडी बंद कर दी गई।
डायलिसिस, प्रसव, ऑपरेशन सहित कोरोना लक्षण वाले (जुकाम-खांसी व बुखार) को छोड़कर अन्य सारे विभाग बंद हो गए। इस बाबत प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने बताया कि यहां बड़ी संख्या में कोरोना मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा कोरोना केस तेजी से बढ़ रहे हैं। इस वजह से नॉन कोविड और साधारण रोगियों के इलाज पर रोक का निर्णय लिया गया है। कहा कि गंभीर मरीजों के लिए मेडिकल कालेज की इमरजेंसी चालू रहेगी। कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के लिए मेडिकल टीम पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने बताया कि संक्रमितों को भर्ती करने के लिए 400 बेड हैं। इनमें 320 बेड आइसोलेशन वार्ड और 80 बेड आईसीयू में हैं। मौजूदा में मंडल के चारों जिलों के 152 कोरोना संक्रमित भर्ती हैं। इनमें 12 गंभीर कोरोना पॉजिटिव आईसीयू में हैं।
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चेन्नई से आ रही दूसरी आरटीपीसीआर जांच मशीन
बांदा। जिले में कोरोना के केस तेजी से बढ़ने पर आरटीपीसीआर जांच का दबाव भी बढ़ गया है। मेडिकल कालेज में जांच का दायरा बढ़ाने के लिए शासन ने एक और आरटीपीसीआर टेस्टिंग मशीन उपलब्ध कराई है। अभी मात्र एक टेस्टिंग मशीन है। प्रधानाचार्य डा. मुकेश यादव ने बताया कि आधुनिक तकनीक से लैस विदेशी आरटीपीसीआर जांच मशीन चेन्नई से सड़क से बांदा आ रही है। कल (बुधवार) तक मशीन के यहां पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में रोजाना लगभग 3500 से 4000 कोरोना टेस्ट किए जा रहे हैं। पूर्व में 1500-2000 जांच होती थी। उनका दावा है कि सात माह पूर्व शुरू हुई आरटीपीसीआर जांच में अब तक 3,08,000 टेस्ट किए जा चुके हैं। अभी दो सौ से तीन सौ नमूनों की जांच में आठ से 10 घंटे का समय लगता है। दूसरी मशीन शुरू होने पर इतने ही समय में दोगुना टेस्ट किए जा सकेंगे। (संवाद)
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पहले टेस्ट, फिर इलाज
बांदा। मेडिकल कालेज में कोरोना संदिग्धों की जांच और इलाज जारी है। इनमें जुकाम, खांसी, बुखार के मरीज शामिल हैं। प्रधानाचार्य ने बताया कि फिजीशियन इन रोग से ग्रसित मरीजों को देखते रहेंगे। साथ ही इन रोगों के मरीजों के कोरोना टेस्ट भी किए जा रहे हैं। रिपोर्ट आने तक उन्हें नॉन कोविड वार्ड में रखा जाता है। पॉजिटिव मरीजों को आइसोलेशन में भर्ती कर दिया जाता है। (संवाद)
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सीएचसी में नहीं मास्क और सैनिटाइजर
अतर्रा। सीएचसी में मास्क और सैनिटाइजर न होने से मरीज व तीमारदार लौट रहे हैं। दो दिन पूर्व सीएचसी में कार्यरत डॉक्टर समेत दो स्वास्थ्यकर्मियों की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. शिव सागर ने तीनों स्वास्थ्य कर्मियों को 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन किया है। फार्मासिस्ट सुभाष ने बताया कि सीएचसी में मास्क व सैनिटाइजर का टोटा है। सोमवार को वह मास्क व सैनिटाइजर लेने गए थे, लेकिन वहां तैनात कर्मियों ने उन्हें बिना सामान दिए ही लौटा दिया। (संवाद)
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स्कूल कैंपस में कराया सैनिटाइज
अतर्रा। ब्रह्म विज्ञान इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य शिवदत्त त्रिपाठी ने बताया कि कार्यालय नियमित खोले जा रहे हैं। पंचायत चुनाव में केंद्र बनाने समेत बोर्ड परीक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्यालय कैंपस पर छिड़काव कराया गया है। शिक्षकों व कर्मियों को मास्क पहनकर आने के निर्देश दिए गए हैं। (संवाद)