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Banda News: दवा व सर्जिकल आइटम के दाम बढ़े, इलाज हुआ महंगा

Tue, 31 Mar 2026 11:30 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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फोटो- 01 शंकर मेडिकल स्टोर में दवाएं देते दुकानदार। संवाद
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बांदा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर अब भारतीय फार्मा व्यापार पर भी दिखने लगा है। ईरान और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण दवाओं और सर्जिकल सामान के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप इन उत्पादों की कीमतों में दस से बीस फीसदी तक की वृद्धि हुई है। इस मूल्य वृद्धि ने मरीजों के लिए इलाज कराना और भी महंगा कर दिया है।
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दवा व्यापारियों ने बताया कि यह समस्या ईरान-इजराइल युद्ध के बाद से उत्पन्न हुई है। भारत में दवाओं और सर्जिकल सामान के लिए आवश्यक कच्चा माल मुख्य रूप से अमेरिका, चीन और वियतनाम जैसे देशों से आता है जो अक्सर नेपाल के रास्ते भारत तक पहुंचता है। वर्तमान संघर्ष के चलते इस आयात मार्ग पर बाधा उत्पन्न हुई है। जिससे कच्चे माल की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है।



कीमतों में वृद्धि के प्रमुख कारण



युद्ध के कारण आयात प्रभावित हुआ है, जिससे दवा कंपनियों को उत्पादन के लिए आवश्यक सामग्री नहीं मिल पा रही है।



कच्चे माल की अनुपलब्धता के चलते दवा निर्माण इकाइयों को अपना उत्पादन घटाना पड़ा है।



कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ परिवहन लागत और अन्य परिचालन खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई है।



इन उत्पादों पर पड़ा असर



मौजूदा में दर्द और बुखार की आम दवाओं जैसे पैरासिटामोल, निमोससुलाइड, एंटीबायोटिक दवाओं जैसे सिप्रोफ्लोक्सासिन और नॉरफ्लोक्सासिन की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इसके अलावा, कैनुला, आईवी फ्लूइड बोतलें, ग्लव्स, थर्मामीटर और एक्सरे फिल्म जैसे आवश्यक सर्जिकल सामान भी महंगे हो गए हैं।
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दवा व्यापारियों ने बताया कि ग्लूकोज की बोतलों और खांसी के कफ सिरप के दामों में भी तीस से चालीस फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। जो कफ सिरप पहले पचास रुपये में उपलब्ध था, वह अब अस्सी रुपये तक बिक रहा है। इसी तरह, ग्लूकोज की बोतलों की बढ़ी हुई कीमतों ने मरीजों के लिए एक और समस्या खड़ी कर दी है।



दवाओं और सर्जिकल आइटमों की कीमतों में एक माह के भीतर हुई वृद्धि



आइटम पहले के दाम (रुपये में) मौजूदा दाम (रुपये में)



सिरिंज (100 पीस) 130 145



आईवी फ्लूइड बंडल 400 450



थर्मामीटर (प्रति पीस) 50 70



ग्लव्स (प्रति पीस) 40 50



दवा उपयोग पहले के दाम (रुपये में) मौजूदा दाम (रुपये में)



निमोससुलाइड दर्द निवारक 450 650



पैरासिटामोल बुखार 280 450



सिप्रोफ्लोक्सासिन एंटीबायोटिक 1600 2500



थियोकोलचिकोसाइड मांसपेशी दर्द 2.95 लाख 6 लाख



कच्चा माल आने में दिक्कत



पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चा माल भारत नहीं आ पा रहा है। जिससे दवाओं व सर्जिकल सामान निर्माण तेजी से नहीं हो पा रहा है। जिससे दाम बढ़ना स्वाभाविक है।



संतोष ओमर
अध्यक्ष दवा विक्रेता संघ, बांदा



दवा के दामों ज्यादा असर



दवा व सर्जिकल आइटम में दस से बीस फीसदी व कुछ दवाओं में तो तीस से चालीस फीसदी तक दाम बढ़े हैं। इसकी वजह मौजूदा युद्ध के हालातों के चलते विदेशों से कच्चा माल न आना है।



अमित सेठ

व्यापारी
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मरीजों पर अतिरिक्त बोझ



पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालातों के चलते दवा व सर्जिकल आइटम का कच्चा माल नहीं आ रहा है। जिससे कंपनियों ने उत्पादन कम होने से दस से बीस फीसदी तक दाम बढ़ा दिए हैं। इससे मरीजों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
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ओम गुप्ता

दवा विक्रेता

फोटो- 01 शंकर मेडिकल स्टोर में दवाएं देते दुकानदार। संवाद

फोटो- 01 शंकर मेडिकल स्टोर में दवाएं देते दुकानदार। संवाद

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