बुंदेलखंड को पूर्वांचल से जोड़ेगा, तीन महीने में शुरू हो जाएगा सर्वे
कानपुर। बुंदेलखंड से पूर्वांचल को जोड़ने का एक नया प्रोजेक्ट तेज हो गया है। चित्रकूट से प्रयागराज होते हुए वाराणसी तक 6-लेन हाईस्पीड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस 249 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर करीब 15,000 करोड़ की लागत आएगी। इसकी डिजाइन को मंजूरी मिल गई है और परियोजना के लिए पहली किस्त 10.37 करोड़ रुपये जारी भी कर दिए गए हैं। अब इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि तीन महीने में इसका सर्वे शुरू हो जाएगा। इसके बाद जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भोपाल की कंपनी आइकाॅन इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को सर्वे का जिम्मा सौंपा गया है। कंपनी अगले तीन महीनों में सर्वे कार्य शुरू कर देगी। यह ग्रीन फील्ड कॉरिडोर चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी को सीधे जोड़ेगा, जिससे यात्रियों और माल परिवहन दोनों को ही बड़ा लाभ मिलेगा। अभी इस समय चित्रकूट से प्रयागराज होते हुए वाराणसी जाने में घंटों लगते और जगह-जगह जाम की समस्या झेलनी पडती है। नए हाईस्पीड कॉरिडोर के बन जाने से यात्रा का समय काफी घटेगा। इसके बाद 6-लेन सड़क पर तेज रफ्तार वाहन आसानी से आवागमन कर सकेंगे। आर्थिक विकास को नई उड़ान यह परियोजना सिर्फ परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास के भी नए द्वारा खोलेगी। नए कॉरिडोर के बनने से औद्योगिक क्षेत्रों तक तेज़ी से पहुंच बनाई जा सकेगी, कृषि उत्पादों को बाजार तक लाने में आसानी होगी और पर्यटन स्थलों का आकर्षण बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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दो धार्मिक नगर बनेंगे पर्यटन का केंद्र
चित्रकूट और वाराणसी दोनों ही धार्मिक शहर हैं। चित्रकूट को रामायण काल से जुड़ा माना जाता है जबकि वाराणसी विश्व के सबसे प्राचीन तीर्थों में से एक है। प्रयागराज का संगम क्षेत्र पहले ही धार्मिक पर्यटन का केंद्र है। तीनों स्थलों को जोड़ने वाले इस हाई स्पीड कॉरिडोर से तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को विशेष सुविधा मिलेगी।
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परियोजना पर एक नजर
लंबाई: 249 किलोमीटर
लागत: लगभग 15,000 करोड़
लेन: 6-लेन हाईस्पीड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर
प्रगति: डिजाइन पास, पहली किस्त 10.37 करोड़ जारी
तीन महीने के भीतर शुरू हो जाएगा सर्वे
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माल ढुलाई तेज होगी, निर्माण लागत घटेगी
परियोजना को लेकर थोक और बड़े व्यापारियों में खासताैर पर उत्साह है। उनका कहना है कि सड़क के निर्माण से माल ढुलाई तेज होगी और लागत भी घटेगी। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आसपास के इलाकों में विकास की गति तेज होगी। परियोजना को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस कॉरिडोर को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने की योजना है।
चित्रकूट डीएम का वर्जन
आकांक्षी जिले के विकास के लिए लगातार शासन प्रशासन के प्रयास जारी हैं। इसी कड़ी में बुंदेलखंड को पूर्वांचल से जोड़ने वाली ग्रीनफील्ड कॉरीडोर योजना है। हालांकि इसका अभी सर्वे शुरु हो रहा है लेकिन इस योजना का सबसे ज्यादा पिछड़े जिले चित्रकूट को लाभ मिलेगा। पूरे बुंदेलखंड को पूर्वाचंल से जोड़ने की इस योजना के पूरी होने पर रोजगार के बहुत अवसर होंगे। क्षेत्र से पलायन रुकेगा।बडे उद्यमी उद्यम लगाने को प्रेरित होंगे। बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे, डिफेंस कॉरीडोर व रामपथगमन योजना पहले से ही इस क्षेत्र के विकास में कदम आगे बढ़ाया गया है।
-शिवशरणप्पा जीएन-जिलाधिकारी चित्रकूट