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बिजली जुड़े तो पानी मिले

Tue, 12 Apr 2016 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बुंदेलखंड जल संकट - फोटो : ब्यूरो, अमर उजाला
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बांदा। सूखे बुंदेलखंड में बिजली-पानी के लिए मचे हाहाकार से हर कोई वाकिफ है। लोग नदी का पानी पी रहे हैं। कुछ इलाकों के लोगों को तो कई किलोमीटर दूर बैलगाड़ियों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। संकट से जूझ रहे लोगों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली देने का फरमान कई बार जारी कर चुके हैं। भरपूर बिजली-पानी के लिए मुख्य सचिव भी कई घोषणाएं कर चुके हैं।
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केंद्र और राज्य सरकार ने भरपूर पैसा भी दिया है। इसके बाद भी चित्रकूटधाम मंडल की 13 पेयजल परियोजनाएं अधूरी हैं। इनमें आठ परियोजनाएं तो केवल बिजली न मिलने से लटकी हैं। इन परियोजनाओं पर अरबों रुपये खर्च हो चुके हैं। अगर ये चालू हो जाएं तो करीब ढाई लाख की आबादी को साफ-सुथरा पानी मिलने लगे, पर अधिकारी अपनी कछुआ चाल बढ़ा नहीं रहे हैं। शहरों को 18 और गांवों को बमुश्किल 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल रही है।

जल निगम ने बुंदेलखंड पैकेज से अरबों रुपये की परियोजनाएं तैयार कीं। पेयजल आपूर्ति के लिए नलकूप बनाए गए। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के तहत बांदा जिले में सात करोड़ 97 लाख की पनगरा पेयजल योजना को पिछले साल मार्च 2015 में पूरा होना था। इससे 13000 आबादी को पाइप्ड पेयजल से स्वच्छ जल पहुंचाने की मंशा थी। काम 100 फीसदी पूरा है, पर बिजली कनेक्शन न होने से यह चालू नहीं हो पा रही है।
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इसी जिले की 14 करोड़ की बबेरू पेयजल योजना पिछले साल दिसंबर में पूरी होनी थी। इससे 19,967 घरों में पानी पहुंचना है। काम तो पूरा है, पर बिजली कनेक्शन नहीं है। बांदा जिले की ही 17 करोड़ की मरका पेयजल योजना भी इसी माह शुरू होनी थी। इसका 85 फीसदी काम ही पूरा हुआ है।

यह परियोजना भी बिजली के अभाव में लटकी है। इससे 1900 की आबादी को पेयजल मुहैया कराना था। बांदा में ही साढ़े 13 करोड़ लागत की अतर्रा ग्रामीण पेयजल योजना अगस्त 2015 में पूरी होनी थी। इसका काम पूरा है, पर बिजली कनेक्शन नहीं हो पाया। इससे 13700 आबादी को पानी मिलना है।

महोबा जिले के कबरई ब्लाक में साढ़े पांच करोड़ की रिवई सुनैचा पेयजल परियोजना दिसंबर में पूरी होनी थी, जो बिजली के अभाव में लटकी है। इससे 7000 लोगों को पानी मिलना है। इसके अलावा इसी जिले की 3.47 करोड़ की मवई खुर्द पेयजल योजना भी अधूरी है। इससे 6000 आबादी को पानी मिलेगा।

चित्रकूट जिले की सबसे अहम 62 करोड़ 57 लाख की बरगढ़ पेयजल परियोजना वर्ष 2014 में पूरी होनी थी। इससे 3600 आबादी को पानी मुहैया कराने की मंशा है। इसका 10 फीसदी काम अधूरा है। इससे पाठा के लोगों को स्वच्छ पानी नसीब नहीं हो रहा।

इसी जिले में एक अरब 79 करोड़ 27 लाख की मऊ ग्राम समूह पेयजल योजना पिछले साल मई में पूरी होनी थी। 900 किलो लीटर और 1400 किलो लीटर के दो ओवरहेड टैंक बनाकर 1,17,636 आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मंशा थी लेकिन 90 फीसदी के बाद बिजली पर काम अटक गया।

इसके अलावा इसी जिले की 8.66 करोड़ की गढ़चपा पेयजल योजना से 22000 आबादी को पानी मिलना है। यह भी बिजली के अभाव में लटकी है। 6.46 करोड़ की लौरी ग्राम पेयजल योजना से 16900 आबादी को पानी मिलना है, जो अधूरी पड़ी हैं।
-अधूरी पड़ी पेयजल परियोजनाएं जल्द पूरी की जाएंगी। कई परियोजनाओं का काम तो हमने पूरा कर लिया है लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं मिल रहा है। इससे इनको शुरू करने में विलंब हो रहा है। उम्मीद है कि इसी महीने से इन परियोजनाओं का स्वच्छ पानी जनता को मिलने लगेगा।
-आरके त्रिपाठी, अधीक्षण अभियंता, जल निगम (निर्माण मंडल) बांदा


- पेयजल परियोजनाओं में बिजली कनेक्शन के लिए जल निगम ने इसी साल आवेदन किए थे। प्रक्रिया पूरी होने में कुछ समय तो लगता ही है। लाइन खींचने का काम चल रहा है। कुछ जगहों पर काम पूरा भी हो गया है।
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- एके सक्सेना, मुख्य अभियंता, विद्युत वितरण खंड, चित्रकूटधाम मंडल।
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