बांदा। यौन उत्पीड़न के केस में सीबीआई ने पंचम अपर सत्र न्यायाधीश/पॉक्सो एक्ट विशेष न्यायाधीश की अदालत में पीड़ित बच्चों के बयानों की प्रतियां (नकल) आरोपियों के अधिवक्ताओं को उपलब्ध करा दी हैं। हालांकि बयान संबंधी नकल में बच्चों के नाम, पते में काली स्याही पोत दी गई है। सीबीआई की दलील है कि आरोपियों के मददगार यौन उत्पीड़न के शिकार बालकों को धमका सकते हैं। उधर, आरोपी निलंबित जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती की न्यायिक अभिरक्षा 9 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है।
सीबीआई ने यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चों के 161 सीआरपीसी के तहत बयान दर्ज किए थे। इसके अलावा 164 सीआरपीसी के बयान के लिए 25 बच्चों को सीबीआई ने अदालत में पेश किया था। बुधवार (24 मार्च) को अदालत में सुनवाई के दौरान सीबीआई उपाधीक्षक अमित कुमार ने पीड़ित बच्चों के दर्ज किए गए बयान संबंधी नकलें आरोपियों के अधिवक्ता अनुराग पटेल और भूरा प्रसाद निषाद को उपलब्ध करा दीं। बच्चों के नाम और पतों पर काली स्याही लगा दी गई है। इस पर सीबीआई की दलील है कि यौन उत्पीड़न के शिकार बालकों के नाम और पता उजागर होने पर आरोपियों के मददगार उन्हें धमका या धन का लालच देकर अपने पक्ष में बयान करा सकते हैं।
उधर, न्यायाधीश मोहम्मद रिजवान अहमद ने आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती की न्यायिक अभिरक्षा 9 अप्रैल तक बढ़ा दी है। साथ ही न्यायाधीश ने सीबीआई विवेचक को 164 सीआरपीसी बयान की प्रतियां भी आरोपियों के अधिवक्ताओं को 9 अप्रैल को उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। उधर, न्यायाधीश एक अन्य दिल्ली के आरोपी आकिब की चार्जशीट 6 अप्रैल को हर हाल में अदालत में उपलब्ध कराने के लिए सीबीआई विवेचक को आदेश दिए हैं।
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