प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा ने निर्देश दिया है कि बुंदेलखंड के प्रत्येक जिले में कम से कम पांच एकड़ या उससे अधिक भूमि चिह्नित कर वहां सघन पौधरोपण किया जाए। यहां के जिस जिले में प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की जरूरत हो तो उसका प्रस्ताव अधिकारी शासन को भेजें। उन्होंने यह भी कहा कि बुंदेलखंड में पेयजल योजना का कार्य शीघ्र शुरू होगा।
मंगलवार को ऑनलाइन आयोजित मंडलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी को संबोधित करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि किसानों से अधिक से अधिक एफपीओ गठित कराए जाएं ताकि उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके। कृषि विभाग के अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों को निर्देश दिया कि कृषि की नई तकनीकें किसानों तक पहुंचाएं ताकि उनकी आमदनी बढ़ सके। गोष्ठी में कई किसानों ने समस्याएं बताईं और सुझाव भी दिए।
आयुक्त सिन्हा ने इनके समाधान का भरोसा दिलाया। गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रदेश के प्रमुख सचिव कृषि डा.देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि जो कर्जदार किसान फसल बीमा योजना में बीमा नहीं कराना चाहते वह बैंकों को पहले ही सूचित कर दें। प्रमुख सचिव उद्यान/कृषि निदेशक डा.सिराज सिंह और निदेशक (पशुपालन) व अपर आयुक्त आदि ने भी गोष्ठी को संबोधित किया।
मंडलायुक्त गौरव दयाल ने कहा कि चित्रकूटधाम मंडल में खरीफ फसलों की तैयारी कर ली गई है। साथ ही इसका आच्छादन बढ़ाने की कार्य योजना भी बनाई गई है। मनरेगा से प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण कार्य प्राथमिकता से कराए जा रहे हैं।
अन्ना पशुओं से फसल बचाने को मंडल में स्थायी व अस्थायी गोशालाएं बनाई गई हैं। डीएम अमित सिंह बंसल ने कहा कि बांदा में कठिया गेहूं की विशेष प्रजाति पैदा होती है। इसका दलिया बहुत स्वादिष्ट होता है। कठिया गेहूं पैदा करने वाले किसानों का एफपीओ बनाने का प्रयास चल रहा है।
खरीफ गोष्ठी में चित्रकूट जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय, महोबा जिलाधिकारी अवधेश कुमार तिवारी तथा हमीरपुर सीडीओ समेत कई किसानों ने भी संबोधित किया। संयुक्त विकास आयुक्त रमेशचंद्र पांडेय, बांदा सीडीओ हरिश्चंद्र वर्मा, उप निदेशक कृषि एके सिंह, उप निदेशक सूचना भूपेंद्र यादव आदि उपस्थित रहे।