समाजवादी पेंशन में दलालों की खूब दाल गल रही है। तमाम मानक और पात्रता की शर्तें दरकिनार कर दलालों और बिचौलियों के इशारे पर ही बनाई गई सूची में अब जमकर बवाल हो रहा है। रोजाना बड़ी तादाद में पात्र आवेदक पेंशन की आस में समाज कल्याण कार्यालय में दस्तक दे रहे हैं। यहां उनको झिड़क कर भगाया जा रहा है।
सपा सरकार की समाजवादी पेंशन योजना को जिले में बिचौलियों और दलालों ने ‘कैप्चर’ कर रखा है। सरकार ने पहले तहसील व ब्लाक स्तर पर जांच कराई। इसके बाद जिला स्तरीय अधिकारियों की टीमें गठित कर गांव-गांव क्रॉस चेकिंग कराई। बावजूद इसके दलालों के काकस को ये जांचें भेद नहीं पाईं।
इन दलालों की मुट्ठी गर्म करने में लाचार बेसहारा और गरीबों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उनका न सूची में नाम आया और न ही पेंशन खाते में पहुंची। सूची में कुछ का नाम आ गया लेकिन दलालों के इशारे पर उसे काट दिया गया।
ऐसे सैकड़ों गरीब रोजाना समाज कल्याण विभाग दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। यहां उन्हें बाबुओं की डांट-फटकार और बेइज्जती झेलनी पड़ रही है। विकास भवन में बैठने वाले एक दर्जन से ज्यादा अफसरों को यह सुध नहीं कि उनके नाक तले मुख्यमंत्री की एक महत्वाकांक्षी योजना की क्या दुर्गत हो रही है? चार हजार से ज्यादा गरीब कड़ी धूप में दूर-दराज गांवों से यहां भटक रहे हैं।
केवटन पुरवा अंश गढ़ा की मुन्नी देवी ने कहा कि गांव के एक दलाल ने समाजवादी पेंशन फार्म भरवाए थे। वह 500-500 रुपये वसूली कर रहा था। दलाल की यह फरमाइश मैं पूरी नहीं कर पाई। नतीजे में मेरा नाम सूची से हटवा दिया गया। दलाल के इशारे पर ही प्रधान और सचिव भी नाच रहे हैं।
चंदपुरा, नरैनी की रेशमा ने कहा कि सभी औपचारिकताएं पूरी कर दीं लेकिन गांव के दलाल की जेब न गर्म कर पाने से आज तक भागदौड़ करनी पड़ रही है। पेंशन खाते में पैसा भी नहीं पहुंचा। समाज कल्याण कार्यालय में बाबू यह कहकर लौटा रहे हैं कि गांव के उसी दलाल से मिलो। गरीब व विधवा हूं, आखिर 500 रुपये कहां से लाऊं।
समाज कल्याण अधिकारी केके सिंह ने कहा कि समाजवादी पेंशन योजना में लाभार्थियों के चयन के लिए दो बार जांच कराई गई है। अपात्रों को सूची से हटाया गया है। अगर अभी सूची में अपात्र पाए गए तो उन्हें हटाया जाएगा। अभी लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है। जो पात्र रह गए हैं, उन्हें पेंशन का लाभ दिया जाएगा।’