बांदा। प्रधानमंत्री द्वारा 20 अप्रैल से निजी क्षेत्र के अस्पतालों में आम लोगों के इलाज की अनुमति दिए जाने से संबंधी आदेश चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय में परवान नहीं चढ़ सका। चार दिन बीत जाने के बाद भी मुख्यालय का कोई निजी अस्पताल मरीजों के लिए नहीं खुला है। इनके गेट और ओपीडी सेवाएं बंद हैं। इन अस्पतालों की ड्योढ़ी पर मरीज दर्द से कराहते देखे जा रहे हैं। यह मामला मंडलायुक्त तक पहुंचा है।
लॉकडाउन लागू होने के बाद मुख्यालय के सभी प्राइवेट अस्पतालों में सेवाएं बंद कर दी गईं। इकलौते जिला अस्पताल में कोरोना संबंधी टेस्ट और अन्य मरीजों की भरमार है। ऐसे में आर्थिक हैसियत रखने वाले तमाम मरीजों के लिए निजी अस्पताल ही एक मात्र सहारा हैं।
प्रधानमंत्री ने 20 अप्रैल को दी कई छूटों में निजी अस्पतालों की सेवाएं भी शुरू करने को कहा था। इसी के बाद सीएमओ और डिप्टी सीएमओ ने मुख्यालय के निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया। वहां की व्यवस्थाएं देखीं। लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी मुख्यालय के किसी निजी अस्पताल को अनुमति नहीं दी गई।
इन अस्पतालों में मरीजों को बैरंग लौटाया जा रहा है। मौजूदा कोविड-19 संकट के मद्देनजर प्राइवेट अस्पतालों को और भी अधिक सक्रिय किया जाना चाहिए था। लेकिन यहां इसका उलट हो रहा है।
मंडलायुक्त गौरव दयाल ने इस मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जानकारी मांगी है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.संतोष कुमार का कहना है कि जनपद के कुल 16 निजी अस्पतालों को हाल ही में मानक और व्यवस्थाएं पूरा करने के लिए पत्र जारी किया जा चुका है।
सीएमओ के मुताबिक छह निजी अस्पतालों रफीक नर्सिंग होम, विक्रम चाइल्ड केयर सेंटर, अवनी परिधि हेल्थ केयर, अक्षत मेटरनिटी होम, मोबुदा नर्सिंग होम और अनुराग नर्सिंग होम के नाम प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक को गुरुवार को भेजे गए हैं।
निजी अस्पतालों को अनुमति पत्र अब तक जारी न किए जाने के सवाल पर सीएमओ का कहना था कि शीघ्र महानिदेशक से हरी झंडी मिलते ही अनुमति पत्र जारी कर दिए जाएंगे।