तेज धूप की तपिश से बचने के लिए मुंह बांधकर जाते बाइक सवार। संवाद
- फोटो : BANDA
बांदा/चित्रकूट। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार मार्च में गर्मी के तेवर कुछ ज्यादा तीखे हैं। इसकी वजहराजस्थान के रास्ते पाकिस्तान से आने वाली उत्तर पश्चिमी हवाएं बताई जा रही हैं। इन हवाओं ने मध्य मार्च में ही लू जैसा अहसास करा दिया है। पथरीली धरती होने के कारण बुंदेलखंड में पारा कुछ ज्यादा तेजी से चढ़ने लगा है। रविवार को बांदा में अधिकतम तापमान 41 और चित्रकूट में 40 डिग्री दर्ज किया गया। दोनों जिलों में न्यूनतम पारा 23 डिग्री के आसपास है।
मौसम के जानकार बता रहे हैं कि इस वर्ष बुंदेली धरती को तपाने में तापमान रिकार्ड तोड़ सकता है। यहां सुबह नौ बजे से ही मई-जून की तपिश का अहसास होने लगा है। दोपहर 12 बजे तक हवाएं लू में बदल जा रही हैं। शाम पांच बजे तक हालात जस के तस रहते हैं। गर्मी की वजह से रात में भी लोग बेहाल हो रहे हैं। ह
ोली के पहले तक मौसम इतना गर्म नहीं था। अधिकतम पारा 37 डिग्री के इर्द गिर्द टिका हुआ था। हालांकि ये भी ज्यादा था, लेकिन रविवार को अधिकतम तापमान में चार डिग्री की उछाल ने सभी को बेहाल कर दिया। पिछले साल इन्हीं दिनों यानी मार्च के दूसरे पखवारे में इतनी तपिश नहीं थी।
इसके पीछे वजह यह रही कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते पहाड़ों की तरफ से आने वाली हवा तापमान को कम कर देती थीं, इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। गनीवा कृषि फार्म के मौसम वैज्ञानिक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि इन दिनों उत्तर-पश्चिम गर्म हवाएं पाकिस्तान से राजस्थान के रास्ते से होकर यूपी में दाखिल हो रहीं हैं। यही वजह है कि बुंदेलखंड में तापमान में तेजी से इजाफा हुआ है।
कई वर्षों का टूटा रिकार्ड, 10 डिग्री की छलांग
बांदा। मार्च की शुरूआत में तापमान के यह तेवर कई वर्षों के बाद देखे जा रहे हैं। एकबारगी पारे में लगभग 10 डिग्री सेल्सियस की छलांग लगाई है। कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्व विद्यालय बांदा में मौसम विभाग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश साहा ने बताया कि मार्च के पहले पखवारे में पिछले कई सालों के बाद ऐसी तपिश देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में इन दिनों 32 डिग्री। वर्ष 2019 में 31.1 डिग्री। वर्ष 2020 में 30.3 डिग्री और पिछले वर्ष 2021 में मार्च के पहले पखवारे में पारे का अधिकतम पैमाना 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।