बांदा। एक तरफ मानसून की बेरुखी धान की फसल के लिए संकट बनी है तो वहीं दूसरी तरफ केन कैनाल नहर ने मुसीबत खड़ी कर दी है। नया पुल बनने के दौरान झाल की दीवार टूटने से एक हजार बीघा क्षेत्रफल में धान की रोपाई पिछड़ गई है। अगर जल्द ही काम पूरा न हुआ तो किसान धान की रोपाई नहीं कर पाएंगे।
गिरवां से गुजरने वाली केन कैनाल नहर से आसपास के बड़े क्षेत्रफल में किसान फसलों की सिंचाई करते हैं। नहर के चलते यहां धान का रकबा काफी अधिक है। इस बार भी किसानों ने धान की रोपाई के लिए नर्सरी लगाई थी लेकिन नहर पर नए पुल के निर्माण ने किसानों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है।
दरअसल, गिरवां में बस स्टॉप के पास नहर पर बना पुराना पुल तोड़कर नया पुल बनाया जा रहा है। पुराना पुल तोड़ने के दौरान नहर में बनी झाल की दीवार भी टूट गई। पुल से ठीक पहले बनी यह दीवार चेकडेम की तरह काम करती थी। इससे नहर में पीछे जलस्तर अधिक रहता था। इससे किसानों के खेतों की तरफ पानी आसानी से चला जाता था। दीवार टूटने के बाद पानी का स्तर नहर में काफी नीचे आ गया है।
इसके कारण गांव दुर्गापुर, सरसवाल, गिरवां, गढ़ी चांदपुर, पतराहा के करीब एक से डेढ़ हजार बीघा क्षेत्रफल में नहर का पानी ही नहीं पहुंच रहा है। खेतों में धान की नर्सरी तैयार खड़ी है, लेकिन रोपाई के लिए पानी ही नहीं है। बारिश कम होने से पहले से ही चिंतित किसान परेशान हैं। अगर देरी होती रही, धान की पैदावार प्रभावित होने की भी आशंका है। किसान भुवनेश, सत्येंद्र तिवारी, दीपक, महेंद्र, राजेश तिवारी, विनीत तिवारी , शैलेंद्र कुमार, अंकुर द्विवेदी, विकेश दुबे, पिंकू तिवारी ने बताया कि उनके सामने इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं है।
परेशान किसानों ने डीएम से भी मुलाकात कर अपना दर्द बताया था। डीएम के आदेश पर नहर का पानी रोककर उसमें प्लेटें लगाकर जलस्तर बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है। लेकिन यह काम भी अब तक पूरा नहीं हुआ है।
धान रोपाई में देरी से बढ़ेगा नुकसान
धान की रोपाई का उपयुक्त समय 1 जुलाई से 15 जुलाई के बीच होता है। इसी दौरान किसान धान की उन प्रजातियों की रोपाई करते हैं, जो पांच माह से छह माह में तैयार होती हैं। अब लगातार हो रही देरी से किसान इन प्रजातियों की रोपाई नहीं कर पाएंगे। वहीं किसान अगर चाहें भी तो न तो कम समय में तैयार होने वाले धान की नर्सरी तैयार कर सकते हैं और न ही पूर्व से तैयार नर्सरी को लगा सकते हैं।
कैसे होगी धान की सिंचाई
किसान अगर किसी तरह खेतों में बारिश होने या निजी संसाधनों से सिंचाई कर धान की रोपाई भी कर दें तो आगे संकट खड़ा हो जाएगा। धान की फसल के लिए काफी पानी की आवश्यकता होती है। लंबे समय से नहर होने के कारण यह सिंचाई आसानी से हो जाती थी, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं है। वहीं पुलिस निर्माण में भी अभी पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
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किसानों की समस्या को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था कराई गई है। नहर में पानी भी छोड़ा गया है। किसानों को जल्द ही धान की रोपाई के लिए पानी मिलेगा। बाद में नहर बंद होने पर संबंधित कार्यदायी संस्थान द्वारा पक्की दीवार बनाई जाएगी।
-अरविंद कुमार पांडेय, अधिशासी अभियंता नहर विभाग -
फोटो-16-केन कैनाल नहर पर निर्माणाधीन पुल। संवाद