बांदा। दो साल पूर्व खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ घोषित) हो चुके जिले में अब भी ग्रामीण खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। व्यक्तिगत शौचालय से वंचित सैकड़ों ग्रामीण ग्राम प्रधान और सचिव के यहां चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें शौचालय आवंटित नहीं हुआ है। उधर, दावा किया जा रहा है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में तीन लाख से अधिक शौचालय बनाए गए हैं।
जिले के आठ ब्लाकों में 471 ग्राम पंचायतें हैं। जिला पंचायत राज विभाग का दावा है कि पिछले चार सालों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रथम चरण (एसबीएम) में 2,45,333, द्वितीय चरण (एलओबी) में 67,305 और तृतीय चरण (एनएलबी) में 4527 व्यक्तिगत शौचालय बनाए गए हैं।
इतनी बड़ी संख्या में शौचालय बनाए जाने के बाद भी हजारों की संख्या में ग्रामीण आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायतों में वार्षिक कार्य योजना के लिए हो रही खुली बैठकों में आज भी सबसे ज्यादा समस्याएं पीएम आवास और व्यक्तिगत शौचालयों की सामने आ रही हैं।
शौचालय नहीं किया आवंटित
कैलाशीपुरवा की चुन्नी देवी का कहना है कि वह एक साल से व्यक्तिगत शौचालय के लिए भागदौड़ कर रही हैं।, लेकिन उन्हें अभी तक शौचालय नहीं मिला। बताया कि पूरा परिवार खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है।
छह माह बाद भी नहीं मिली किस्त
चटगन की चिरैया देवी का कहना है कि शौचालय न मिलने से उनका परिवार परेशान है। बताया कि छह माह से वह अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरी में परिवा खुले में शौच को जाता है।
चार साल में लक्ष्य के सापेक्ष शौचालय बनाए गए हैं। शौचालय निर्माण की प्रक्रिया चलती रहेगी। परिवारों में बंटवारा होने से शौचालय की मांग बढ़ना स्वाभाविक है। ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। संजय यादव-डीपीआरओ, बांदा।
Open defecation continues even after two years of ODF- फोटो : BANDA