बांदा। रेलवे अभियंताओं की चूक और अदूरदर्शिता से एक तरफ जहां रेलवे को करीब चार करोड़ रुपये और लगाने पड़े वहीं दूसरी तरफ विभाग की किरकिरी भी हुई। ट्रेन संचालन में रोड़ा अटका सो अलग। बांदा-झांसी रूट पर दुरेड़ी गांव के पास स्थित अंडरपास ब्रिज का निर्माण शुरू से ही लापरवाही की भेंट चढ़ गया।
नतीजे में मात्र ढाई वर्ष में ही यह पुल दो बार धराशायी हो चुका है। फिलहाल इसका पुनर्निर्माण युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है। रेलवे के अधिकारी खुद यहां रात-दिन डेरा डालकर अपने निर्देशन में काम करा रहे हैं। ट्रेनों को फिलहाल मात्र 5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से काम चलाऊ पुल के ऊपर से गुजारा जा रहा है।
एमपी की सीमा पर स्थित आधा दर्जन से अधिक गांवों को मुख्यालय बांदा और बांदा-झांसी नेशनल हाईवे को जोड़ने के लिए रेलवे ने वर्ष 2019 में दुरेड़ी गांव के पास क्रासिंग बंद कर तीन करोड़ की लागत से अंडरपास ब्रिज बनवाया था। लेकिन तकनीकी खामियों के चलते यह पिछले वर्ष 11 सितंबर को बारिश में मिट्टी धंसने से 50 मीटर लंबी रिटेनिंग वॉल धराशायी हो गई, तब सड़क का रास्ता बंद हो गया था।
जांच में ब्रिज निर्माण में तकनीकी खामियां सामने आने के बाद लेआउट में परिवर्तन किया गया। जिसमें चार करोड़ का अतिरिक्त खर्च आया। नए लेआउट के अनुसार ब्रिज का निर्माण चल ही रहा था कि सोमवार को आरयूबी (रेल अंडरब्रिज) के पास की मिट्टी धंस गई और मुख्य ट्रैक 20 फिट नीचे जा गिरी।
सोमवार को पांच घंटे ट्रेनों का आवागमन ठप रहा। युद्धस्तर पर निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही वैकल्पिक व्यवस्थाओं से ट्रेनों को बेहद धीमी गति से यहां से निकाला जा रहा है। रेलवे के सहायक मंडल अभियंता (निर्माण) हरीशंकर का कहना है कि कार्य पूरा होने में छह दिन का समय लगेगा। बताया कि मोटी कंक्रीट की दीवार तैयार कराई जा रही है।
नए ले-आउट में छोड़ दिया ट्रैक बैंक का पुनर्निर्माण
बांदा। रेलवे के तकनीकी अधिकारियों द्वारा की गई फौरी जांच में सामने आया है कि नए लेआउट में आरयूबी (रेल अंडरब्रिज) को छोड़ दिया गया। जो पुराने ले-आउट के अनुसार बना था। इसकी दीवार कमजोर होने से मिट्टी धंस गई। अधिशासी अभियंता (निर्माण) शिव सिंह का कहना है कि नए ले-आउट में आरयूबी न को शामिल किया गया है। दोनों ओर से ढाई फिट मोटी दीवार तैयार की जा रही है। यह दीवार ब्रिज के अंतिम छोर तक जाएगी। ताकि मिट्टी धंसने से ब्रिज को नुकसान न हो। निर्माण कार्य में मानिकपुर, झांसी, महोबा व बांदा आदि के लगभग एक सैकड़ा से ज्यादा कर्मचारी व मजदूर लगाए गए हैं।
छात्र-छात्राओं को जान जोखिम में डाल निकलना पड़ रहा
दुरेड़ी गांव के पास अंडर पास ध्वस्त हो जाने से आधा दर्जन गांवों के ग्रामीणों का सड़क यातायात बाधित हो गया है। सबसे ज्यादा जोखिम और दुश्वारी छात्र-छात्राओं को हो रही है। बांदा से जाने वाले एकलव्य महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं और गांवों से शहर आने वाले छात्र-छात्राओं को निर्माणाधीन ट्रैक के ऊपर से जान जोखिम में डालकर यूं निकलना पड़ रहा है।