महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की नौवीं वर्षगांठ पर मजदूरों को मजदूरी में 10 फीसदी बढ़ोत्तरी का तोहफा मिलेगा। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। नए वित्तीय वर्ष 2015-16 में यह सौगात मिलेगी।
इसके लिए 76.90 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेबर बजट अनुमोदन को भेजा गया है। मंगलवार को मनरेगा ने नौ वर्ष पूरे कर लिए। यह योजना पूरे देश में दो फरवरी 2006 को शुरू हुई थी। केंद्र सरकार हर वर्ष योजना बनाने से पहले जनपदों से कार्य योजना मंगवाती है। ताकि उसी हिसाब से मनरेगा का लेबर बजट जारी किया जा सके।
नौ वर्ष के बाद दसवीं मनरेगा योजना में शासन से मिले आदेश पर हाल ही में यहां के प्रशासन ने वर्ष 2015-16 के लिए लेबर बजट बनाकर शासन को अनुमोदन के लिए भेज दिया है। इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा लेबर बजट में 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है।
यह 76 करोड़ 90 लाख 43 हजार रुपये का बनाया गया है जबकि पिछले वर्ष 2014-15 में लेबर बजट लगभग 70 करोड़ रुपये का था। लेबर बजट ब्लाकवार तैयार किया गया है। सबसे ज्यादा बड़ा बजट 15 करोड़ 30 लाख 79 हजार रुपये की कार्ययोजना नरैनी ब्लाक के लिए बनाई गई है।
महुआ ब्लाक के लिए नौ करोड़ 99 लाख 60 हजार, कमासिन ब्लाक के लिए आठ करोड़ 27 लाख 61 हजार, बिसंडा के लिए नौ करोड़ 37 लाख 90 हजार, बबेरू के लिए 10 करोड़ 94 लाख 24 हजार, तिंदवारी के लिए नौ करोड़ 54 लाख 24 हजार, जसपुरा के लिए पांच करोड़ सात लाख 42 हजार और बड़ोखर ब्लाक के लिए आठ करोड़ 39 लाख 33 हजार रुपए का लेबर बजट तैयार किया गया है।
अप्रैल से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष में मनरेगा से सभी ब्लाकों में 29,52,981 मानव दिवस सृजित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि बांदा जनपद के 75,476 जॉब कार्डधारक मजदूर परिवारों को रोजगार दिया जा सके। गौरतलब है कि यह आमतौर पर शिकायतें है कि सभी जाब कार्डधारकों को काम नहीं दिया जाता।
मनरेगा में 156 रुपये प्रतिदिन मजदूरी है जबकि प्राइवेट कामों में मजदूरों को 300 रुपए मजदूरी मिल रही है। तभी मनरेगा गांवों में मजदूरों का पलायन नहीं रोक पा रही।