ओला और बारिश से फसल को हुए तगड़े नुकसान का सदमा झेल रहे किसानों के घावों में यह नमक छिड़कने वाली खबर होगी कि जिला प्रशासन ने बांदा जनपद की सिर्फ दो तहसीलों के 16 गांवों को ओला प्रभावित माना है।
अतर्रा में आंशिक नुकसान बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक, मात्र दो करोड़ रुपये की क्षति बताते हुए प्रशासन ने शासन को सर्वे रिपोर्ट भेज दी है। असिंचित क्षेत्र में 4500 रुपये और सिंचित क्षेत्र के किसानों को नौ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे की दर निर्धारित की गई है।
तीन दिनों पूर्व सदर तहसील के खप्टिहा, पैलानी, जसपुरा और बबेरू तहसील के कमासिन, मरका, बबेरू क्षेत्र और अतर्रा व नरैनी तहसीलों के अधिकांश गांवों मेें लगातार दो दिन ओला और बारिश का कहर बरपा हुआ था। खेत में लहलहा रही गेहूं, चना, मसूर, अरहर आदि की फसलें मिट्टी में मिल गईं। पिछले तीन दिनों से पूरे जिले के किसानों में हाहाकार है।
जिला मुख्यालय से लेकर विधान सभा और राज्य सभा तक यह मुद्दा गूंजा है। चौतरफा से मदद और मुआवजे की मांगे की जा रही हैं। इन तमाम गंभीर हालातों के बीच प्रशासन ने कुछ और ही गुल खिलाया है। भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक शासन को भेजी गई सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि बांदा सदर, बबेरू और पैलानी तहसील में ओलावृष्टि हुई ही नहीं।
अतर्रा तहसील में सिर्फ सात गांव प्रभावित हुए हैं वह भी आंशिक रूप से। प्रशासन ने अतर्रा तहसील मेें सिर्फ 28 लाख रुपये मुआवजे के लिए मांगे हैं। इसी तरह नरैनी क्षेत्र के सिर्फ नौ गांवों में ओला से नुकसान बताया गया है। यहां के लिए 1,71,44,154 रुपये की मांग की गई है। यानि प्रशासन की नजरों में सिर्फ 2,09,44,154 रुपये का नुकसान हुआ है।
उप जिलाधिकारी का कहना है कि सर्वे मौके पर जाकर किया गया है। किसी किसान या क्षेत्र के साथ कोई पक्षपात नहीं हुआ है।