लेप्रोस्कोपिक पद्धति की जानकारी देते डॉ.अनूप सिंह व डॉ.भूपेंद्र सिंह।
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पित्ताशय में पथरी के दर्द से कराहते मरीज को अब कानपुर और लखनऊ की दौड़ नहीं लगाना पड़ेगी। राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में बिना चीरा ऑपरेशन संभव होगा। सप्ताहभर पूर्व यहां आई लेप्रोस्कोपिक मशीन से सर्जन ने पहला सफल ऑपरेशन किया। खर्च भी औसतन एक हजार रुपये आया। लखनऊ-कानपुर जाकर ऑपरेशन कराने पर मरीज को हजारों रुपये का खर्च उठाना पड़ता है।
शहर से करीब छह किलोमीटर दूर तिंदवारा गांव की आरती पत्नी नरेंद्र कुमार पित्ताशय में पथरी के दर्द से परेशान थीं। एक साल कई जगह इलाज कराया लेकिन आराम नहीं लगा। गुरुवार को हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें मेडिकल कॉलेज ले आए। यहां तैनात सर्जन डॉ.अनूप सिंह ने दूरबीन पद्धति (लेप्रोस्कोपिक) से पहला सफल ऑपरेशन किया। शुक्रवार को डॉ. सिंह ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक मशीन सप्ताहभर पूर्व ही मेडिकल कॉलेज में आई है।
इस पद्धति से पहला ऑपरेशन किया गया है। जिले में इकलौते एनेस्थेटिस्ट (एमडी क्रिटिकल केयर) डॉ.सुशील कुमार भी शामिल रहे। सर्जन ने बताया कि बिना चीरा के ऑपरेशन से मरीज का खून नहीं बहता। दो दिन बाद छुट्टी दे दी जाती है। इस दौरान नाक, कान, गला व कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.भूपेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे। उधर, सर्जन डॉ.अनूप सिंह का दावा है कि पूरे इलाज में मरीज का मात्र एक हजार रुपये से ज्यादा खर्च नहीं आएगा।
इसमें ऑपरेशन की सरकारी फीस 400 रुपये भी शामिल है। इसी मर्ज के इलाज के लिए कानपुर और लखनऊ जाने पर मरीज के 5 से 7 हजार रुपये तक खर्च होते हैं। इसमें सरकारी शुल्क और दवाओं के अलावा आने-जाने तथा तीमारदारों के रहने-खाने का खर्च भी शामिल है। निजी अस्पतालों में तो यह खर्च 30 हजार या इससे भी अधिक आता है।