बांदा। क्रशर व्यवसायी इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत से इस घटना के कई अहम राज खुलने की परिस्थितियां कुछ धूमिल पड़ गई हैं। गोली लगने के बाद घायल व्यवसायी द्वारा कोई बयान न दे पाने से इस मामले में अब आरोपियों को सजा गवाहों और पुलिस की विवेचना पर निर्भर करेगी।
जैसा कि कहा जा रहा है कि गोली से घायल होने के बाद इंद्रकांत कोई बात नहीं कर सके। अगर मरने से पूर्व बयान हो जाते हैं तो आरोपियों को सजा लगभग तय मानी जाती है। कानून के जानकार वरिष्ठ अधिवक्ता भी यही बात कह रहे हैं।
क्रशर व्यवसाई के मामले में महोबा के पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज हो जाने से यह मामला काफी हाई प्रोफाइल बन गया है। व्यवसायी इंद्रकांत का घटना से कुछ दिनों पूर्व वायरल वीडियो जिसमें उसने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक पर पैसा मांगने और जान से मारने की धमकी देने की बात कही थी, के बाद से ही यह मामला सुर्खियों में आने लगा था।
गोली मारे जाने और उसके बाद अब मृत्यु हो जाने पर यह प्रकरण और संगीन हो गया है। उधर, चित्रकूटधाम मंडल के वरिष्ठ अधिवक्ता (फौजदारी) अशोक दीक्षित का कहना है कि अगर मरने के पूर्व बयान हो जाएं तो केस काफी मजबूत हो जाता है, लेकिन इंद्रकांत के मामले में अगर बयान नहीं हो पाए हैं तो अब इस घटना के गवाह ही अभियुक्तों को जेल पहुंचाकर सजा दिला सकेंगे।
इस घटना में परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर भी काफी कुछ निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि व्यापारी का पूर्व में वायरल हुआ वीडियो परिस्थितिजन्य साक्ष्य की श्रेणी में आता है। साथ ही अब पुलिस की विवेचना भी दोषियों को दंड दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पुलिस को पता करना होगा कि अगर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक का इसमें हाथ है तो कोई इसका साक्ष्य/गवाह जुटाना होगा। अधिवक्ता के मुताबिक साजिशकर्ता या घटना को अंजाम देने के लिए प्रेरित करने वाले को भी वही दंड मिलता है जो मारने वाले के लिए निर्धारित है। दीक्षित ने कहा कि इसमें मृत्युदंड या उम्रकैद का प्रावधान है।
बुंदेलखंड के क्रशर व्यवसायियों में गम और गुस्सा
बांदा। कबरई (महोबा) क्रशर व्यवसाई इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत से समूचे बुंदेलखंड के क्रशर व्यवससियों में दुख और रोष है। चित्रकूटधाम मंडल में ही 380 क्रशर हैं। इनके संचालकों में भी अपने साथी की मौत पर गम और गुस्सा है।
पुलिस और प्रशासन ने इसको भांपते हुए फिलहाल कबरई में भारी संख्या में पुलिस तैनात कर दी है। लेकिन अगर निष्पक्ष जांच-पड़ताल और असली हत्याभियुक्तों तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंचे तो क्रशर व्यवसायी और अन्य संगठन इसे मुद्दा बनाकर आंदोलन खड़ा कर सकते हैं।