बांदा। चेहरे पर जरा भी कोरोना का नहीं खौफ। न ही इससे बचने का शौक। 10 माह से भी ज्यादा अरसे के बाद बुधवार को खुले जूनियर हाईस्कूलों में यही नजारा था। गुरुजन से लेकर शिष्य और शिष्याओं तक के चेहरे पर मास्क नदारद था। गिने-चुने छात्र-छात्राओं ने भी पहले दिन कक्षाओं में दस्तक दी। पठन-पाठन का माहौल नहीं रहा। छात्र अपने मित्रों और छात्राएं सहेलियों से बीते 10 माह की चर्चाओं में मशगूल रहे।
शासन से मंजूरी मिलने के बाद शिक्षा निदेशक बेसिक ने बुधवार से जूनियर हाईस्कूल खोलने और कोविड-19 की आठ पृष्ठीय गाइड लाइन जारी की थी। निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक पहले दिन बुधवार को सिर्फ आठवीं कक्षा के ही छात्र-छात्राओं को बुलाया गया था। साथ ही स्कूल आने के लिए अभिभावक की लिखित सहमति का पत्र भी लाना था। बच्चों के बीच छह फीट की दूरी और विद्यार्थी और स्टाफ को मास्क अनिवार्य किया गया है।
सैनिटाइजेशन, थर्मल स्क्रीनिंग की भी सख्ती से ताकीद की गई है लेकिन पहले ही दिन यह दिशा-निर्देश बेअसर रहे। जो बच्चे स्कूल आए उनमें कोरोना को लेकर ज्यादा भय या खौफ नजर नहीं आया। शायद उनके अभिभावक भी इससे निश्चिंत थे। तभी बच्चों को मास्क के साथ नहीं भेजा। जनपद में कुल 630 परिषदीय जूनियर हाईस्कूल हैं। मंडल मुख्यालय के कुछ स्कूलों में पहला दिन कैसा रहा? इसकी बानगी प्रस्तुत है-
नगर पालिका बालिका इंटर कॉलेज में कक्षा 6,7 और 8 कक्षाओं की छात्राएं एक साथ मिलीं। कोई मास्क नहीं लगाए थीं। जीजीआईसी में छात्राओं की संख्या अन्य स्कूलों की अपेक्षा ठीक ठाक थी। लेकिन सोशल डिस्टेंस, मास्क इत्यादि का अनुपालन नहीं था। छात्राओं से लेकर टीचर्स तक के चेहरों से मास्क नदारद था। गेट में चतुर्थ श्रेणी कर्मी छात्राओं की थर्मल स्क्रीनिग और सैनिटाइजेशन करता रहा। जूनियर हाईस्कूल बलखंडीनाका स्कूल, पूर्व माध्यमिक विद्यालय पुलिस लाइन, पूर्व माध्यमिक विद्यालय, देवनगर (झील का पुरवा), उच्च प्राथमिक विद्यालय, पल्हरी में आदि विद्यालयों में लगभग एक जैसे नजारे थे। बच्चों की तादाद गिनी चुनी। अलबत्ता स्टाफ पूरा था।
जीजीआईसी की छात्रा निशा निषाद ने का कहना था कि कोरोना ने कोर्स को बहुत नुकसान पहुंचाया। स्कूल खुलने से एक नया उत्साह पैदा हुआ है। मम्मी पापा ने बेझिझक स्कूल भेजा है। कक्षा में पढ़ने का मजा ही कुछ और है। जूनियर हाईस्कूल पुलिस लाइन की छात्रा आराधना ने बताया कि घर में पढ़ाई का माहौल नहीं मिल रहा था। लेकिन महामारी से बचना भी जरूरी था। हालांकि खतरा अभी टला नहीं है। ऐसे में सतर्कता और बचाव के साथ कक्षा अटेंड करेगी। पूर्व माध्यमिक विद्यालय झील का पुरवा में छात्रा सोमवती ने बताया कि वह बेसब्री से स्कूल खुलने का इंतजार कर रही थी। आज सुबह ही वह तैयार हो गई। माता-पिता ने भी स्कूल जाने की इजाजत दे दी।