प्रदेश सरकार के खजाने से एक हफ्ते से भी ज्यादा समय पहले निकल चुकी साढ़े 32 करोड़ की राहत राशि बुंदेलखंड के किसानों की जेब तक नहीं पहुंची है। नतीजे में मौसम के कहर का शिकार हुए 5 लाख 26 हजार से ज्यादा किसान शासन और प्रशासन को कोस रहे हैं। अब मुख्यमंत्री के तल्ख तेवर देखकर प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की रकम बांटने में तेजी दिखाई है।
बुंदेलखंड के चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा के किसान बेमौसम बारिश और ओलों की मार से कराह रहे हैं। सरकार ने मंडल के 1843 गांवों के 6,78,438 किसानों को इस दैवीय आपदा से पीड़ित माना है।
इन किसानों की 6,32,635 हेक्टेअर की फसल मटियामेट हुई है। चारों जिलों के प्रशासन ने प्रदेश सरकार से राहत के लिए 3 अरब 14 करोड़ 78 लाख रुपये की मांग की थी। शासन ने फिलहाल 97 करोड़ 83 लाख रुपये ही दिए हैं। लेकिन यह पूरी रकम भी किसानों तक नहीं पहुंची है।
ओला, बारिश का कहर बरपा हुए 10 दिन से ज्यादा बीत गए हैं और मंडल के चारों जिलों में अब तक मात्र 64 करोड़ 98 लाख रुपये ही किसानों तक पहुंच पाए हैं। 32 करोड़ से ज्यादा सरकारी पैसा फिलहाल प्रशासन के खजानों की शोभा बढ़ा रहा है। यह स्थिति दो दिन पहले तक की है।
हालात ये हैं कि किसानों के घर चूल्हे नहीं जल रहे हैं और प्रशासनिक मशीनरी लेट-लतीफी और काहली पर आमादा है। 97.83 करोड़ में अब तक सिर्फ 64.98 करोड़ रुपये की बांटे गए हैं। मंडल के चारों जिलों में 5,26,182 किसान ऐसे हैं जिन्हें अब तक राहत के नाम पर एक रुपया भी नहीं मिला है।
अलबत्ता इन जिलों का प्रशासन दावा कर रहा है कि 1,52,256 किसानों को 97 करोड़ 83 लाख रुपये बांटे जा चुके हैं। पहली किस्त में मिली राहत के पूरी तरह बंट न जाने तक शायद प्रदेश सरकार भी अगली किस्त न दे।