नागरिकता संशोधन बिल (कैब) को लेकर चल रहे देशव्यापी आंदोलन में चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय बांदा भी सुर्खियों में शामिल हो गया। शुक्रवार को यहां जुमा की विशेष साप्ताहिक नमाज के बाद ऐतिहासिक नवाबी जामा मस्जिद में मुस्लिम समुदाय ने बिल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा कि भारत ऐसा गुलदस्ता है जिसमें हर धर्म और मजहब के फूल महक रहे हैं। इनमें से किसी को भी नजरअंदाज किया जाना मुल्क के साथ नाइंसाफी है। बिल वापस लिया जाए।
कुछ मुस्लिम संगठनों ने जुमा की नमाज के बाद हर शहर में बिल का विरोध करने का आह्वन किया था। इसी के तहत यहां आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और स्थानीय मुस्लिमों ने मिल जुलकर जुमा की नमाज के बाद मुख्यालय की नवाबी जामा मस्जिद के बाहर प्रदर्शन किया। उनके हाथों में नागरिकता बिल और एनआरसी विरोधी तख्तियां थीं।
शहर काजी मौलाना मेराज मसूदी (अकील मियाँ) ने कहा कि कैब और एनआरसी बिल संविधान के खिलाफ हैं। इससे मुल्क की एकता पर गलत असर पडे़गा। शहर काजी मौलाना कमरूद्दीन ने कहा कि यह बिल काला कानून है।
देश के अधिकांश हर वर्ग के लोग इससे सहमत नहीं हैं। बिल वापस लिए जाए। एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष वाजिद अली ने कहा कि कैब बिल संविधान के अध्याय-14 के खिलाफ है। इस बिल से हमारे मुल्क की एकता को खतरा पैदा हो सकता है। आल इंडिया काजी बोर्ड उपाध्यक्ष मौलाना मुमताज रब्बानी और अंसार अहमद सिद्दीकी ने भी बिल को असंवैधानिक बताया।
भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में आयोजित प्रदर्शन और सभा के बाद उसी स्थान पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार सिंह और पुलिस उपाधीक्षक (नगर) आलोक मिश्रा ने ज्ञापन प्राप्त किया।
राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद-14 के विपरीत नागरिकता बिल पेश किया है। इसे वापस लिया जाए।
प्रदर्शन व ज्ञापन देने में आबिद मियां रब्बानी, वाजिद रब्बानी, बुंदेलखंड इंसाफ सेना के एएस नोमानी, यूनुस खां, शराफत अली, उमैर नदवी, इरशाद खां, मोहम्मद अलीम, इदरीस खां, सलीम मंसूरी, शानू खां, रिजवान अली, आमिर खां, हाशिम अब्दुल रऊफ, मिर्जा बलीगुद्दीन बेग, आफताब अहमद आदि शामिल रहे।