जुलाई-अगस्त का महीना पाठा के जंगलों को हराभरा कर देता है। जंगलों की हरियाली दस्यु गिरोहों के लिए कवच बन जाती है, लेकिन जब से मोबाइल फोन का प्रचलन हुआ इन डकैतों की शामत आ गई। सर्विलांस के जरिए लोकेशन लेकर पुलिस इन्हें ढूंढ-ढूंढकर ठिकाने लगा देती है। यही जुलाई-अगस्त का महीना दस्यु गिरोहों पर भारी पड़ता है। ददुआ, ठोकिया के बाद दस्यु सरगना बलखड़िया को भी लील गया।
दस्यु सरगना शिव कुमार उर्फ ददुआ के जिंदा रहते वर्ष 2000 में उसके समानांतर अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया गिरोह वजूद में आ गया था। अत्याधुनिक स्वचालित हथियारों से लैस 35 सदस्यीय ठोकिया गिरोह की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि गैंग में डेढ़ दर्जन ऐसे बदमाश थे जिन पर 50 हजार से लेकर 5 लाख तक का इनाम घोषित था।
इनमें सरगना ठोकिया सहित सुंदर पटेल उर्फ रागिया, स्वदेश पटेल उर्फ बलखड़िया, रामचंद्र पटेल, ज्ञान सिंह परिहार, शिवमूरत पटेल उर्फ सिपाही, मइयादीन पटेल उर्फ लमझगड़ बाबा और राजकरन पटेल जैसे कई नाम शामिल थे। कुछ एक सालों में ही इस गैंग ने यूपी और एमपी में कई वारदातें कीं।
अपशकुन की बात करें तो शुरुआत ठोकिया के चाचा राजकरन पटेल उर्फ चच्चू से हुई। 15 अगस्त 2006 में एसटीएफ ने रायबरेली से राजकरन और ठोकिया के छोटे भाई दीपक को दबोच लिया। बाद में इलाहाबाद के छोटा बघाड़ा चौराहे में राजकरन को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया।
23 जुलाई 2007 को अनुसुइया आश्रम के पास मुठभेड़ में ठोकिया का खास साथी मइयादीन पटेल उर्फ लमझगड़ पुलिस की गोली से ढेर हो गया। 4 अगस्त 2008 को दस्यु सरगना ठोकिया अपने ही गांव सिलखोरी में मारा गया। 2 जुलाई 2015 को मारकुंडी क्षेत्र के किहुनियां जंगल में बलखड़िया को पुलिस मुठभेड़ में गोली लग गई। बाद में उसकी मौत हो गई। हालांकि शव पुलिस के हाथ नहीं लगा।
जुलाई और अगस्त महीनों में डकैतों ने भी कहर बरपाया। 23 जुलाई 2003 को दस्यु सरगना ठोकिया ने भरतकूप क्षेत्र के बगहिया पुरवा में दिनदहाड़े धावा बोलकर दो मासूमों समेत आधा दर्जन लोगों को मार डाला था। 22 जुलाई 2007 की तारीख कौन भूलेगा।
साथी मइयादीन की मौत से बौखलाए ठोकिया ने बघोलन तिराहे के पास कोल्हुवां जंगल में घेरकर एसटीएफ के 6 जवान और एक मुखबिर को भून डाला। बुंदेलखंड के दस्यु इतिहास में यह पहली घटना थी जब पुलिस पर इतना बड़ा हमला हुआ था। डोंड़ामाफी (चित्रकूट) में 12 अगस्त 2012 में दस्यु दल ने घर घुसकर ग्राम प्रधान के पति समेत 5 लोगों को गोलियों से छलनी कर दिया था।