दस्यु बलखड़िया गैंग ने 12 वर्ष के अंतराल में चार बड़े नरसंहार किए । चारों में कुल 30 निर्दोष लोग मारे गए। इनमें आधा दर्जन एसटीएफ जवान भी शामिल हैं। अगर हत्याओं की बात करें तो बलखड़िया पर अकेले 60 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकार्ड में वह सबसे क्रूर डकैत गिना जाता था।
बहिलपुरवा थाना क्षेत्र के बरूई गांव निवासी बलखड़िया साधन संपन्न परिवार से 6 भाइयों में तीसरे नंबर का था। बचपना लड़ाई-झगड़े में गुजरा तो जवान होते-होते अपराध की दुनिया से नाता जोड़ लिया। उसका साथ गुड्डा पटेल, नया गांव (एमपी) से हुआ तो बीहड़ की राह पकड़ ली।
एक बार घर से निकला तो फिर वापस नहीं लौटा। यहीं उसे गुड्डा के अलावा ठोकिया और शंकर केवट का साथ मिला। वर्ष 2000 के बाद यह पुलिस रिकार्ड में सूचीबद्ध हुआ। इसके बाद तो बलखड़िया ने ठोकिया गैंग के साथ मिलकर वारदातों की झड़ी लगा दी।
बड़ी वारदातों की बात करें तो ठोकिया, शंकर केवट, रागिया के साथ बलखड़िया ने भरतकूप चौकी क्षेत्र के बगहियापुरवा में 27 जुलाई 2003 को आधा दर्जन लोगों को गोलियों और बमों से मौत के घाट उतारा। मरने वालों में दो बच्चे एक महिला भी थी।
बघोलन गांव के पास कोल्हुआ जंगल में डकैतों के हमले में 6 एसटीएफ जवान और एक मुखबिर मारे गए थे। मध्य प्रदेश के बिछियन गांव में बलखड़िया और रागिया ने गिरोह के साथ सबसे बड़ा नरसंहार किया। यहां कोल परिवार के दर्जन भर लोगों को घर में कैद कर ंजिंदा जला दिया।
इसके बाद बलखड़िया ने बहिलपुरवा थाना क्षेत्र (चित्रकूट) के डोंडा माफी गांव में प्रधानपति सहित पांच की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। इतनी बड़ी वारदातों में शामिल रहने वाले बलखड़िया पर तब जाकर शासन ने पांच लाख का इनाम घोषित किया था।