बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के बांध खाली हो गए। अब मानसून के मेहरबान होने पर ही खेतों को मिलेगा पानी। मंडल के सभी बांध ‘डेड स्टोर’ हो गए हैं। कुछेक एक बांधों की तलहटी पर नाममात्र को पानी बचा है। सिंचाई विभाग अभियंताओं का कहना है कि 3 जुलाई से नहरों का चलाना प्रस्तावित है लेकिन यह तभी होगा जब बारिश से बांध उफनाएं।
मंडल के चारों जिलों में खेत और पेट के लिए पानी का रोना पुराना है। गर्मी के मौसम में हर साल यह संकट और गहरा जाता है। अबकी भी ऐसे ही हालात हैं। मानसूनी मौसम (वर्षा ऋतु) शुरू होने में अभी एक पखवारा है। 15 जून से बारिश का मौसम माना जाता है।
हालांकि पिछले कई साल से बुंदेलखंड में मानसून जुलाई और अगस्त में सक्रिय होता है। मंडल के चारों जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से ऊपर चल रहा है। शिद्दत की गर्मी से जनजीवन जूझ रहा है। उधर, मंडल के सभी बांध पानी से खाली हो गए हैं। तलहटी पर नाममात्र को पानी नजर आ रहा है। अब इन बांधों को मानसूनी बारिश का ही आसरा है। पर्याप्त बारिश से बांध भरेंगे तभी नहरों का संचालन होगा खेतों को पानी मिल सकेगा।
बांधों में उपयोगी क्षमता और उपलब्ध पानी (मिलियन घन मीटर में)
बांध उपयोगी क्षमता उपलब्ध पानी
गंगऊ (छतरपुर) 56.46 00
रनगवां (छतरपुर) 155.18 7.36
बरियारपुर (पन्ना) 12.6 1.85
ओहन (चित्रकूट) 37.75 1.01
बरूआ (चित्रकूट) 23.26 2.21
अर्जुन (महोबा) 58.45 5.38
चंद्रावल (महोबा) 30.86 2.83
मझगवां (महोबा) 25.92 0.11
कबरई (महोबा) 11.94 00
उर्मिल (महोबा) 113.50 13.90
मौदहा (हमीरपुर) 179.00 72.60
गुंता (चित्रकूट) 24.50 4.84
रसिन (चित्रकूट) 13.63 6.82
तलहटी का पानी पशुओं के लिए नहर में छोड़ा
बांदा। पशुओं की प्यास बुझाने के लिए बांधों में बचा खुचा पानी नहर में छोड़ दिया गया है। नहर के इस पानी से सिंचाई इत्यादि नहीं की जा सकेगी। इस पर कड़ाई से रोक है। यह पानी नहरों में 8 मई से चलाया जा रहा है।
केन कैनाल के अधिशासी अभियंता एके पांडेय ने बताया कि पशुओं को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए बांध की तलहटी में जो भी पानी था उसे नहर में चालू कर दिया गया है।
फिलहाल इस पानी से नहर चल रही है। उन्होंने कहा कि इसके बाद नहर संचालन तभी संभव होगा, जब बारिश से बांधों में पानी का भंडार होगा। फसलों के लिए 3 जुलाई से नहरें चलाना प्रस्तावित है, लेकिन यह तभी हो सकेगा जब इसके पूर्व पर्याप्त बारिश से बांधों में पानी उपलब्ध हो सके।
Monsoon eyes to fill dry dams- फोटो : BANDA