बागै नदी की जलधारा में खनन करती पोकलैंड।
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बांदा। खदानों में खनन पर लगी रोक हटने के एक माह बाद भी पट्टाधारकों ने खनन चालू करने के लिए खनिज विभाग में पैसा और एनओसी नहीं जमा नहीं की। इस कारण खनिज विभाग के अभिलेखों में अधिकांश खदानें बंद हैं। उधर, दूसरी तरफ अवैध खनन का कारोबार दिन-रात बड़े पैमाने पर हो रहा है।
इसकी बानगी रंज और बागै नदियां हैं। रंज नदी में जलधारा रोककर नदी के आरपार बनाए रास्ते से अवैध खनन से निकाली गई बालू के ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं। बागै नदी की जलधारा में पोकलैंड और लिफ्टर मशीनें उतारकर तलहटी से खनन हो रहा है। अवैध खनन से हर दिन लाखों रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है।
नरैनी संवाद के मुताबिक कोतवाली क्षेत्र के बरकोला कलां और गोपरा गांव के मध्य रंज नदी की जलधारा रोककर बालू माफिया ने आरपार रास्ता बना लिया है। इसमें बालू भरे ट्रैक्टर निकाले जा रहे हैं। गांव के लोगों ने बताया कि रात में लगभग 50 ट्रैक्टर पूरी रात बालू ढोते रहते हैं।
गांव के बाहर बालू का भंडारण तथा ट्रकों की लोडिंग कराई जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार पुलिस और लेखपाल को सूचना दी जा चुकी है, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुल बनाने से नदी की जलधारा बाधित हो रही है। पानी का प्रवाह आगे नहीं बढ़ पा रहा है। एसडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। तहसील अधिकारियों को भेजकर जांच कराएंगी।
उधर, अतर्रा तहसील के महुटा और बरकतपुर गांवों में बागै नदी की जलधारा में पोकलैंड और लिफ्टर मशीनें लगाकर खनन किया जा रहा है। नदी की तलहटी पर खनन होने से गहराई बढ़ रही है। इससे आसपास के गांवों के बच्चों के डूबने का खतरा बढ़ेगा। नदी का अस्तित्व भी खतरे में है।
इस मुद्दे पर बुंदेलखंड किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने बुधवार को डीएम को संबोधित पत्र कलक्ट्रेट में सिटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र सिंह को सौंपते हुए कहा है कि पर्यावरण को भी क्षति पहुंच रही है। कहा कि पूरे बुंदेलखंड में अवैध खनन की पराकाष्ठा है। ज्ञापन देने वालों में यूनियन अध्यक्ष विमल शर्मा सहित श्रवण कुमार, दिनेश निरंजन, श्रीकांत मिश्रा आदि शामिल रहे।