बांदा। लॉकडाउन में बंद हुआ मंडल मुख्यालय का इकलौता राजकीय पुस्तकालय अब 1 नवंबर से फिर खुल गया है, लेकिन पहले की तरह छात्र-छात्राएं यहां नहीं आ रहे हैं। उधर, शासन 10 माह बाद भी रिक्त पड़े पुस्तकालय अध्यक्ष पद पर नियुक्ति नहीं कर सका।
जीजीआईसी बांदा की प्रधानाचार्य को यहां का अतिरिक्त चार्ज दे रखा गया है। यहां के विद्यार्थी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राएं पूर्व डीएम महेंद्र बहादुर सिंह को याद कर रहे हैं। उन्होंने लाइब्रेरी के दिन अच्छा ला दिए थे। जर्जर भवन को आकर्षक और विस्तारित कर आईएएस और पीसीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष कक्षाएं/कोचिंग चालू करा दी थी। उनके स्थानांतरण के बाद बंद है।
पूर्व डीएम के टिप्स कारगर रहे
एसएससी की तैयारी कर रहे उत्कर्ष तिवारी (छोटी बाजार) ने बताया कि तत्कालीन डीएम महेंद्र बहादुर सिंह और उनकी पत्नी खुद यहां आकर गाइड करते थे। इससे छात्र-छात्राओं का उत्साह बढ़ा। उनके दिए टिप्स और नोट्स काफी कारगर साबित हुए।
पढ़ाई की सामग्री भी ज्यादा नहीं
पीसीएस की तैयारी कर रही हिमांशी सोनी (झंडा चौराहा) ने बताया कि पुस्तकालय में अखबार कम आते हैं। अंग्रेजी अखबार पढ़ने को नहीं मिलते। पढ़ाई की सामग्री भी ज्यादा नहीं बची। पूर्व डीएम महेंद्र बहादुर सिंह की व्यवस्थाएं भूल नहीं सकतीं।
कोविड-19 गाइड लाइन के तहत हो रहा संचालन
राजकीय पुस्तकालय का अतिरिक्त चार्ज संभाल रहीं जीजीआईसी बांदा की प्रधानाचार्य बीना गुप्ता का कहना है कि कोविड-19 गाइड लाइन के तहत सीमित संख्या में छात्र-छात्राओं को बुलाया जा रहा है।
पुस्तकालय में किसी चीज की कोई कमी नहीं है और न होने दी जाएगी। वह रोजाना पुस्तकालय की व्यवस्थाओं पर नजर रख रही हैं। कोरोना संक्रमण का असर खत्म होने पर पूर्व की तरह सभी छात्र-छात्राओं को बुलाया जाएगा।
Suhagins looked after Sajan and Chand...- फोटो : BANDA
Suhagins looked after Sajan and Chand...- फोटो : BANDA