बांदा। रोजदारों की दुआओं के सुर अबकी बदले हुए हैं। दुनियां की तमाम खुशियां और नियामतों से पहले वह जानलेवा वबा (कोरोना महामारी) से मुल्क को निजात की फरियाद कर रहे हैं। बीती रात रमजान की दूसरी शबे कद्र थी। रात भर चले इबादतों के दौर में रोजदारों ने इसी दुआ को अव्वल रखा।
बृहस्पतिवार को रमजान का 23वां रोजा पूरा हो गया। अब 6 या 7 रोजे और होंगे। यह आखिरी अशरा है। इसी में पांच रातें 21, 23, 25, 27 और 29वीं को शबे कद्र होती है। बीती रात 23वीं शब थी। बड़ी ताताद में रोजदारों ने घरों पर रहकर रात भर इबादत, तिलावत की। अब तीन शबे कद्र और हैं। इनमें यही दुआ होगी। इसके अलावा सहरी, इफ्तार, तरावीह और पंजगाना नमाजों में भी कोरोना से निजात की दुआएं लगातार हो रही हैं।
महामारी के चलते बड़ी संख्या में लोगों के संक्रमित होने और रोजाना जान गंवाने के माहौल में ईद की खुशियां गुम हैं। लाकडाउन से बाजार भी वीरान हैं, नहीं तो रमजान के ये आखिरी दिन बाजार को गुलजार कर देते थे। ईद के लिए बड़ी तादाद में कपड़ों की खरीद होती थी। उधर, सामूहिक इफ्तार पार्टियां भी नहीं हो पा रही हैं। रोजेदार घरों पर ही इफ्तार कर रहे हैं। मस्जिदों में इक्का-दुक्का लोग ही फर्ज नमाज की अदायगी कर रहे हैं।
इनसेट
----
अलविदा आज, मस्जिदें सूनी
रमजान माह के आखिरी जुमा यानी अलविदा में मस्जिदें नमाजियों से अबकी भी खचाखच भरी नजर नहीं आएंगी। कोविड-19 की गाइडलाइन में मस्जिदों में सिर्फ पांच लोगों को ही एक साथ नमाज अदा करने की इजाजत है। यह लगातार दूसरा साल है जब वबा (महामारी) की वजह से अलविदा की सामूहिक नमाजें अदा नहीं हो पा रही हैं। शहर काजी और शेख सरवर साहब की मस्जिद के इमाम मौलाना मेराज मसूदी (अकील मियां) और नवाबी जामा मस्जिद व ईदगाह के मुतवल्ली डा. शेख सादी जमां ने मुस्लिमों से अपील की है कि यूपी हुकूमत और जिला प्रशासन की कोरोना गाइडलाइन पर अमल करें। घरों पर ही नमाज अदा करें। कोरोना से मुल्क और पूरी दुनियां के निजात के लिए खुसूसी दुआएं करें।
-----------------