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प्रेमी-प्रेमिका की समाधि पर मकर संक्रांति का मेला

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Makar Sankranti fair at the tomb of lover and girlfriend - फोटो : BANDA
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बांदा। शहर के पश्चिमी छोर पर केन नदी और भूरागढ़ दुर्ग के बीच स्थित नटबली मंदिर में दो दिवसीय परंपरागत मेला शुरू हो गया। यह हर वर्ष मकर संक्रांति पर लगता है। इसकी पृष्ठभूमि में प्रेम प्रसंग की कहानी है। दो प्रेमियों की यहां बनी समाधि पर हर वर्ष मकर संक्रांति पर मेला लगता है। बड़ी संख्या में शहरी और ग्रामीणों ने मेले में मनोरंजन किया। नटबली मंदिर में प्रसाद चढ़ाया।
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किवदंती है 1850 ई. में महोबा जिले के सुगिरा का रहने वाला नोने अर्जुन सिंह भूरागढ़ दुर्ग का किलेदार था। यहां से कुछ किलोमीटर दूर सरबई (मध्य प्रदेश) गांव है। वहां नट जाति के लोग आबाद थे। अक्सर करतब दिखाने और कामकाज के लिए नट भूरागढ़ आते थे। किले में काम करने वाले एक युवा नट और किलेदार की पुत्री के बीच प्यार हो गया।
किलेदार को पता चला तो उसने प्रेमी नट से शर्त रखी कि सूत की रस्सी पर चलकर नदी पार लेगा तो वह अपनी बेटी से उसकी शादी कर देगा। खास मकर संक्रांति के दिन नट किले तक नदी में आर-पार सूत की रस्सी बांध और उस पर चलता हुआ किले की ओर बढ़ने लगा। उसका हौसला बढ़ाने के लिए नट बिरादरी के लोग वहां ढोल बजा रहे थे। नट दुर्ग के करीब जा पहुंचा।
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किलेदार नोने अर्जुन सिंह ने रांपी (धारदार हथियार) से रस्सी काट दी। नट नीचे चट्टानों पर आ गिरा और उसकी वहीं मौत हो गई। यह नजारा किलेदार की पुत्री और नट की प्रेमिका देख रही थी। उसने भी दुर्ग से छलांग लगाकर जान दे दी। दोनों प्रेमी-प्रेमिकाओं की याद में घटनास्थल पर दो मंदिर बनाए गए। यह आज भी हैं। नट बिरादरी के लोग इसे विशेष तौर पर पूजते हैं। प्रेमी-प्रेमिकाओं के लिए भी यह खास दिलचस्पी का स्थल बन गया। तभी से हर साल मकर संक्रांति के दिन यहां नटबली मेला लगता है।
मकर संक्रांति पर ही अंग्रेजी फौज से भिड़े थे क्रांतिकारी
बांदा। बुंदेली क्रांतिकारियों ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों से मोर्चा लेकर बड़ी संख्या में प्राण गंवाए थे। इनमें नट और मुस्लिम काफी संख्या में थे। अन्य जातियों के लोग भी शामिल रहे। इतिहासकारों की मानें तो मकर संक्रांति के दिन ही अंग्रेज तानाशाह व्हिटलक की 10 हजार सैनिकों वाली सेना ने हमला करके गोयरा मुगली गांव पर कब्जा कर लिया।
वहां से आगे बढ़ रही अंग्रेजी फौज का क्रांतिकारियों ने भूरागढ़ दुर्ग में जमकर मुकाबला किया। बड़ी संख्या में क्रांतिकारी शहीद हुए। इस युद्ध का नेतृत्व नवाब अली बहादुर सानी ने किया था।

Makar Sankranti fair at the tomb of lover and girlfriend- फोटो : BANDA

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