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Banda News: मशीनरी आई नहीं और ठेकेदार को कर दिया 95 लाख का भुगतान

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बांदा। लोक निर्माण विभाग में सड़कों के निर्माण व मरम्मत के नाम पर जमकर खेल किया जा रहा है। वर्ष 2010 में पीडब्ल्यूडी खंड-2 ने 19 करोड़ सात लाख की लागत से सड़क का निर्माण कराया। मशीनरी के नाम पर करीब 95 लाख रुपये का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया। जबकि, इसमें न बिल बाउचर पेश किए गए और न ही एनवाइस। प्रमुख अभियंता को जांच में अनियमितता मिली है। उन्होंने नोटिस जारी कर आरोपियों से जवाब मांगा है।
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वर्ष 2010 में बसपा शासन काल में बांदा से नरैनी राजमार्ग में सुदढ़ीकरण व चौड़ीकरण का कार्य कराया गया था। शासन से पीडब्ल्यूडी को 19 करोड़ सात लाख रुपये आवंटित किए गए थे। लोक निर्माण विभाग खंड-2 को सड़क बनाने का जिम्मा सौंपा गया था। इसमें जेई से लेकर एक्सईएन तक ने जमकर गोलमाल किया। प्रमुख अभियंता ने कहा है कि वर्ष 2010 में सड़क निर्माण के लिए अनुबंध संख्या 11/एस ई/09-10 गठित किया गया। इसकी कुल लागत 19 करोड़ सात लाख रुपये थी। जनवरी 2010 में इसका निर्माण कराया गया। इस मार्ग के निर्माण में आई शिकायतों के आधार पर जांच की गई।

शासनादेश के मुताबिक व अनुबंध के प्रस्तर 45.2 के मुताबिक ठेकेदार को मोबलाइजेशन एवं मशीनरी अग्रिम व विशेष रूप से कार्य के लिए जरूरी उपकरणों व मशीनरी के लिए स्वीकृत किया जा सकता है। साथ ही ठेकेदार को विशेष उद्देश्य से कार्य स्थल पर लाई गई नई मशीनरी के प्रमाण के संबंध में ऐसे उपकरणों व मशीनों की इनवाइस या बिल की प्रति लोक निर्माण विभाग को प्रस्तुत करना होता है। राज्य सड़क निधि के तहत स्वीकृत कार्य के अभिलेखों की जांच जून 2010 में कराई गई थी। इसमें पाया गया कि एक्सईएन ने ठेकेदार को मशीनरी के लिए अग्रिम भुगतान 95 लाख रुपये कर दिया। नई मशीनरी वास्तव में खरीदी गई व कार्य स्थल पर लाई गई थी, इसे साबित करने के लिए कोई बीजक (बिल) नहीं दिया गया। प्रमुख अभियंता ने जांच आख्या में बताया है कि 95 लाख रुपये की अनियमितात मिली है। बिना मशीनरी लाए ही इतना भुगतान कर दिया गया। उन्होंने अधिकारियों से नोटिस देकर जवाब मांगा है।
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मुख्यमंत्री से की दोषियों को दंडित करने की मांग
बांदा। सपा नेता व पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सुशील त्रिवेदी ने इस गंभीर अनियमितता पर पूर्व में तैनात रहे पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से रिकवरी कराने और उन्हें दंडित करने की मांग मुख्यमंत्री से की है। उन्होंने कहा कि अन्य सड़कों में भी ऐसा ही घालमेल किया गया है। अधिकारियों ने एक-एक लाख के अनुबंध में 40-40 लाख का भुगतान किया है। दोषी भी पाए गए हैं, पर आज तक किसी से रिकवरी व कार्रवाई नहीं हो सकी। इसी तरह अन्य सड़कों में भी मशीनरी के नाम पर फर्जी भुगतान के मामले जांच में सामने आएंगे।


वर्जन-
-मशीनरी के नाम पर भुगतान संबंधी मामले की जांच शासन स्तर पर की गई है। दोषियों को बक्शा नहीं जाएगा। उच्चाधिकारियों के आदेशानुसार कार्रवाई व रिकवरी कराई जाएगी।
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-सुरेंद्र कुमार, अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा
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प्रदीप द्विवेदी
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