करवा चौथ पर छलनी से चांद का दीदार करतीं सुहागिनें।
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पति के प्रति प्यार और समर्पण का प्रतीक पर्व करवा चौथ घर-घर मनाया गया। सुहागिनें अपने सजना के लिए जमकर सजी-धजीं। लगभग 21 घंटे के निर्जला व्रत के बाद देर रात चांद और अपने सुहाग का एक साथ दीदार कर व्रत परायण किया। करवा चौथ की विशेष पूजा की। पूजा में पति के उम्रदराज होने की कामना की।
कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी पर हर वर्ष करवा चौथ मनाया जाता है। सुहाग के यह खास पर्व अबकी शनिवार को था। बीती आधी रात से ही सुहागिनों ने निर्जला व्रत रखा था। इस व्रत में पानी भी नहीं लिया जाता। शनिवार को रात लगभग 9 बजे चंद्रोदय हुआ। इसका सुहागिनों को बेसब्री से इंतजार था।
सोलह श्रृंगार से सजी संवरी सुहागिनों ने करवा और सींक, फूल, सात प्रकार की मिठाई आदि के साथ पूजा की और पति की लंबी उम्र की ईश्वर से कामना की। घरों की छतों पर सुहागिनों ने छलनी से चांद के दीदार किए और पति की आरती उतारी।