बांदा। गेहूं की सरकारी खरीद का पहला दिन अव्यवस्थाओं के बीच लॉकडाउन में बीता। कई केंद्रों के ताले भी नहीं खुले, न बैनर लगाए गए। निरीक्षण को पहुंचे एसडीएम सदर का कहना है कि एक-दो दिन में व्यवस्थाएं ठीक हो जाएंगी।
मुख्यालय के मंडी समिति परिसर में यूपीएसएस के क्रय केंद्र में फर्श टूटी पड़ी है। कांटा, छन्ना व बोरे भी नहीं आए। केंद्र प्रभारी योगेश कुमार का कहना था कि मंडी सचिव को अवगत करा दिया गया है। पीसीएफ केंद्र प्रभारी अजय ने बताया कि बोरा सिलाई मशीन खराब पड़ी है। लॉकडाउन में मिस्त्री नहीं मिल रहा। कांटा, छन्ना अभी मंडी समिति से नहीं मिले हैं।
यही स्थिति भारतीय खाद्य निगम केंद्र की थी। यहां के प्रभारी महेश कुमार का कहना था कि बाजार में बोरे सिलने वाला धागा व रंग नहीं मिल रहा है। बताया कि जमालपुर व जारी गांवों के किसान अरविंद व राजू आए थे। जिन्हें टोकन देकर दो दिन बाद बुलाया गया है। विपणन के क्रय केंद्र में व्यवस्थाएं बेहतर मिलीं।
केंद्र प्रभारी पंकज ने बताया कि कोई भी किसान टोकन लेने के लिए नहीं आया है। कमोवेश यही स्थिति नरैनी, बबेरू, जसपुरा, अतर्रा, महुआ व बिलगांव की भी थी। उधर, एसडीएम सदर सुरजीत सिंह ने मंडी समिति स्थित क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया। अव्यवस्थाएं मिलने पर केंद्र प्रभारियों को फटकार लगाते हुए जल्द व्यवस्था के निर्देश दिए।
एमपी में खेत काटा, पैदल लौट रहे यूपी
बांदा। सीमावर्ती मध्य प्रदेश के खेतों से फसल काटकर खेतिहर मजदूरों की वापसी शुरू हो गई है। लेकिन लॉकडाउन के चलते वाहन मयस्सर न होने पर यह तपती सड़कों और तपाती धूप में पैदल ही अपने कुनबे के साथ घरों को चल पड़े हैं।
सिर पर मजदूरी में मिले अनाज का बोझ है। बुधवार को ऐसा ही खेतिहर मजदूर कुनबा यहां शहर से गुजरा। यह सीमावर्ती छतरपुर जनपद के गांव से फसल काटकर लौटे हैं। बांदा के बिसंडा क्षेत्र के बाघा गांव जा रहे हैं। कुनबे में बच्चे, महिलाएं भी हैं।