ओरन (बांदा)। कक्षा चार में पढ़ने वाले प्रवक्ता राजेश कुशवाहा के बेटे प्रिंस के सोमवार को सुबह दस बजे लापता होने के बाद अगर बिंसड़ा पुलिस सक्रिय हो जाती तो शायद मासूम की जान बच जाती है। ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जानकारी के बाद भी कोई सक्रियता नहीं दिखाई। अगर सक्रियता दिखाती और प्रिंस की खोजबीन शुरू कर देती तो शायद मासूम को बचाया जा सकता था। उधर, एकलौते बेटे की हत्या के बाद परिवार में कोहराम मचा है।
चौसड़ गांव निवासी प्रिंस के पिता राजेश कुशवाहा गांव स्थित भागीरथी महाविद्यालय में प्रवक्ता हैं और उनकी गांव में किसी से कोई रंजिश नहीं है। अलबत्ता उनके बेटे के अपहरण के पीछे शायद फिरौती वसूलने की मंशा नजर आ रही है। इसके पीछे यह भी माना जा रहा कि प्रवक्ता के पास पांच बीघे खेत की जमीन थी। इसमें दो बीघा जमीन बुंदेलखंड एक्सप्रेस में ले ली गई है। इसके मुआवजे के रूप में करीब आठ लाख रुपये मिले थे। शायद अपहर्ताओं की नजर में यह रकम ही खटक रही थी।
वहीं परिजनों का आरोप है कि जितनी सक्रियता पुलिस ने बालक का शव मिलने के बाद दिखाई अगर उतनी सक्रियता अपहरण की सूचना मिलने पर दिखाई होती तो शायद निर्दोष बालक प्रिंस की जान बच जाती। परिजनों और ग्रामीणों में रोष पनपने का यह भी खास कारण है। अपहरण के बाद फोन पर अपहरणकर्ता ने पिता को हिदायत दी थी कि पुलिस को कोई सूचना न दे। वह सुबह फोन पर बताएगा। यानी सुबह कॉल करके फिरौती मांगी जाती।
उधर, बालक का शव बरामद होने के बाद चौसड़ गांव पुलिस छावनी बन गया।
एसपी डा. एसएस मीणा, एएसपी, क्षेत्राधिकारी सहित कई थानों के प्रभारी और फोर्स से गांव पट गया। डॉग स्क्वॉड भी बुला लिया गया। फोरेंसिक टीम भी घटनास्थल पहुंची। पोस्टमार्टम हाउस में भी भारी पुलिस बल तैनात रहा। उधर, सपा नेता भी चौसड़ गांव पहुंचे। बांदा के विधायक प्रकाश द्विवेदी और बबेरू के चंद्रपाल कुशवाहा, जिला पंचायत सदस्य राजेश शिवहरे भी गांव पहुंचे और परिजनों से बात की।
सपा जिलाध्यक्ष विजय करन यादव के साथ सपाइयों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। घटना पर शोक और पुलिस की लापरवाही पर रोष जताया। 30 लाख रुपये मुआवजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई की मांग की। कहा कि अपराधी जल्द गिरफ्तार नहीं हुए तो सपा आंदोलन करेगी। इस मौके पर भरतलाल दिवाकर, अशोक श्रीवास, अचिन खरे, निर्भय सिंह मोंटी, अमोल यादव, शिवम शिवहरे, मुलायम सिंह यादव, मोहित यादव, राजा उपाध्याय, सौरभ गुप्ता, राजा हुसैन, शिवनारायण श्रीवास्तव, मुन्नीलाल कोटार्य आदि मौजूद थे।