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24 घंटे में मिल सकेगी उम्रकैदी को रिहाई

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बांदा। जानलेवा बीमारी से पीड़ित उम्रकैद की सजा पाने वाले लोगों को आवेदन के 24 घंटे के अंदर रिहा किया जा सकता है। जानलेवा बीमारी होने की रिपोर्ट मेडिकल बोर्ड देगा। जेल प्रशासन रिहाई की संस्तुति करेगा। इसके अलावा अन्य उम्रकैदी को न्यूनतम 16 व अधिकतम 20 साल की सजा काटने पर छोड़ा जा सकता है। 70 साल के उम्रकैदी बुजुर्गों को 12 साल और 80 की उम्र पार कर चुके कैदी को 10 साल में रिहाई मिल सकती है।
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प्रदेश सरकार ने जेल नियमावली 2018 और 2021 में संशोधन करते हुए आजीवन कारावास के कैदियों को छोड़ने के नियमों में बदलाव किया है। यह व्यवस्था गैर इरादतन हत्या, हत्या, दुष्कर्म आदि में की गई है, लेकिन जघन्य हत्या (दो से अधिक हत्या) में उम्रकैदी को न्यूनतम 20 और अधिकतम 25 साल की सजा काटने और सामूहिक दुष्कर्म, एक से अधिक बार दुष्कर्म में सजा होने पर न्यूनतम 25 व अधिकतम 30 वर्ष की सजा काटने पर ही रिहाई मिल सकती है।
अभी तक ये था नियम
अभी तक आजीवन कारावास का मतलब उम्रभर जेल में रहना था। कारागार अधीक्षक वीरेंद्र कुमार ने बताया कि इसके लिए कैदी का सजा के दौरान जेल में अधिकारियों, कर्मचारियों सहित अन्य कैदी व बंदियों के बीच व्यवहार बेहतर व चाल चलन सही हो। जेल अधिकारियों की संस्तुति के बाद ही शासन कैदी की रिहाई पर विचार करेगा।
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लकवा के कैदी को मिल सकती है रिहाई
मंडल कारागार में बबेरू के उम्रकैदी गुलाब को जेल में लकवा मार गया है। कैदी उठने-बैठने में असमर्थ है। अन्य बंदी उसका सहारा बने हैं। कारागार अधीक्षक वीरेंद्र कुमार ने बताया कि गुलाब को हत्या के जुर्म में 2018 को उम्रकैद की सजा हुई थी। लकवा मार जाने के कारण बीमार है। नए नियमों के तहत उसकी रिहाई के लिए जिलाधिकारी से मेडिकल बोर्ड के गठन का अनुरोध किया गया है। यदि मेडिकल बोर्ड हरी झंडी देता है तो उसकी रिहाई के लिए शासन को लिखा जाएगा।
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