गोद में बच्चा लेकर पोलिंग पार्टी के साथ बूथ के लिए रवाना होती महिला मतदान कर्मी।
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बांदा। मतदान ड्यूटी से बचने की कोशिशें कार्मिकों ने आखिरी क्षण तक नहीं छोड़ी। बीमारी और दीगर कारणों का हवाला देकर पिछले करीब एक पखवारे से ड्यूटियां कटवाने की कवायदों में जुटे कर्मियों ने मंगलवार को मतदान पार्टियों के रवाना होने से पहले एक बार फिर प्रयास किया।
इनमें अधिकांश महिला कर्मियों को तो सफलता मिली पर पुरुष कर्मियों को नहीं। लगभग 600 अर्जियों में अधिकांश को अधिकारियों ने मंजूर कर लिया। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से लगभग डेढ़ सैकड़ा ड्यूटी कटवाने संबंधी अर्जियां आईं। इनका सिलसिला कई दिनों से ड्यूटी कार्मिक के समक्ष अर्जियां देकर चला आ रहा था।
लेकिन ड्यूटी न कटने पर इन कर्मियों ने मंडी समिति में पोलिंग पार्टियों को रवाना करने के लिए बनाए गए काउंटरों में फिर अर्जी दी। ज्यादातर अर्जियां बीमारी और डबल ड्यूटी (पति-पत्नी) से संबंधित रहीं। महिलाओं के मामले में अधिकारियों ने नरम रुख अपनाते हुए उनकी ड्यूटियां काट दीं। उनके स्थान पर रिजर्व में रखे गए कार्मिकों को भेजा गया।
गोद के साथ वोट का निभाया दायित्व
बांदा। सबसे दयनीय स्थिति उन महिला मतदान कर्मियों की थी जिनके बच्चे दुधमुंहे हैं। महिला कार्मिक सुजाता ने बताया कि उन्होंने अपने दुधमुंहे बच्चे का हवाला देकर प्रशिक्षण के दौरान ही ड्यूटी काटने का अनुरोध किया था, लेकिन नहीं कटी। बीमारी से ग्रस्त कर्मी संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने मेडिकल प्रमाण पत्र के साथ अर्जी दी थी, पर उनकी ड्यूटी नहीं काटी गई।
रवानगी से पूर्व काउंटर पर ड्यूटी काटने की अर्जियां देतीं महिलाएं। - फोटो : BANDA