बांदा। पत्नी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने में ललितपुर के डिप्टी सीएमओ अशोक कुमार दोषी पाए गए। फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश प्रथम पल्लवी प्रकाश ने सात वर्ष कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद दोषी को जेल भेज दिया गया।
इटावा जिले के सिविल लाइंस निवासी डाॅ. अशोक कुमार की शादी 27 जनवरी 1995 को फैजाबाद निवासी शकुन के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही अशोक और उसका परिवार शकुन को दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगा। डाॅ. अशोक वर्ष 1996 में बबेरू सीएचसी में चिकित्साधिकारी के पद पर कार्यरत थे। पत्नी भी उनके साथ ही थीं।
20 मार्च 1996 को शकुन की मौत हो गई। इस पर शकुन के भाई रिटायर्ड आयुक्त कुंवर पाल सिंह ने डाॅ. अशोक के खिलाफ बबेरू कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। विवेचक सीओ धर्मवीर सिंह ने 28 अप्रैल 1996 को अदालत में चार्जशीट पेश की थी। मामले में अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता श्रीराम कुमार सिंह और मनोज दीक्षित की ओर से पांच गवाह पेश किए गए। वर्तमान में डॉ. अशोक कुमार ललितपुर में डिप्टी सीएमओ के पद पर तैनात थे।
अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश प्रथम पल्लवी प्रकाश ने दोषी पाए जाने पर डा. अशोक को सात वर्ष की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को जेल भेज दिया गया।
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शकुन की डायरी बनी सबूत
शकुन आपबीती प्रतिदिन डायरी में नोट करतीं थीं। मामले की सुनवाई के दौरान फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश ने उनकी लिखी डायरी को मृत्युकालिक साक्ष्य माना। शकुन के भाई आगरा निवासी रिटायर्ड राजस्व आयुक्त कुंवर पाल सिंह ने 22 मार्च 1996 में बबेरू कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराने के दौरान तहरीर में लिखा था कि उनकी शकुन अपनी हर बात डायरी में रोज लिखती थी। डायरी बहन के सूटकेस से मिली थी।
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दहेज के लिए नहीं कराई थी विदाई
भाई ने बताया कि 12 फरवरी 1995 को जब बहन शकुन की विदाई कराई तो टीवी, वीसीआर आदि की मांग की गई। मांग पूरी न होने पर बहन की विदाई दीपावली पर नहीं हो सकी। दीपावली के बाद बहनोई डाॅ. अशोक कुमार मथुरा आए और बहन को विदा कराकर ले जाने की बात कही। इसके बाद बहनोई ने विदाई के बाद शकुन को पहले अपनी मां के पास इटावा छोड़ा और फिर बाद में बबेरू ले गए थे।