नरैनी। मुकेरा गांव में सरकारी कोटे की दुकान से राशन
लुटने की घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने अपने बचाव की कवायदें शुरू कर दी
हैं।
कोटेदार ने जो 76 बोरी गेहूं लुट जाना बताया था, उसे आपूर्ति
विभाग ने कालाबाजारी बता कोटा निलंबित कर दिया है। शुरू से ही मामले की
लीपापोती में जुटे एसडीएम ने उल्टा कोटेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की
बात कही है।
सूखे और भूखे बुंदेलखंड के मुकेरा गांव में बुधवार को
शाम कोटेदार से तंग आकर लोगों ने राशन की दुकान में धावा बोलकर राशन लूट
लिया। राशन बांट रहे भरत त्रिपाठी ने 76 बोरी (38 क्विंटल) गेहूं ग्रामीणों
द्वारा लूट लेने की बात अधिकारियों को भी बताई।
इससे पहले
कार्डधारकों ने राशन न मिलने के विरोध में मुख्य सड़क पर जाम लगाया था।
एसडीएम, पूर्ति निरीक्षक और कोतवाली प्रभारी ने राशन दिलाने का भरोसा
दिलाकर जाम तो खत्म करा दिया, लेकिन सभी कार्डधारकों को राशन दिलाने का कोई
ठोस कदम नहीं उठाया। नतीजतन में ‘मरता क्या न करता’ की तर्ज पर ग्रामीणों
ने जबरन राशन छीन लिया।
‘अमर उजाला’ में यह खबर प्रमुखता से छपने के
बाद इस मामले को हल्के ढंग से ले रहे स्थानीय अधिकारी हरकत में आए। साथ ही
अपने बचाव में जुट गए। एसडीएम पुष्पराज सिंह ने बताया कि मुकेरा गांव के
कोटे से शाहपुर गांव भी संबद्ध है।
दोनों दुकानों का राशन यहीं रखा
था। सप्लाई इंसपेक्टर मोहम्मद याकूब के मुताबिक राशन का अभिलेखों से मिलान
किया तो 86 बोरी गेहूं कम पाया गया। एसडीएम के मुताबिक यह गेहूं ब्लैक कर
लिया गया।
एसडीएम ने कहा कि इस आरोप में मुकेरा का कोटा निलंबित कर
दिया गया है। कोटेदार के विरुद्ध रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाएगी। हालांकि
घटना के समय राशन का वितरण भरत त्रिपाठी कर रहा था, जबकि कोटा झुर्री देवी
के नाम है। मुकेरा गांव में राशन लुटने की घटना को डीएम सुरेश कुमार ने
गंभीरता से लिया है।
‘अमर उजाला’ में शुक्रवार को खबर छपने के बाद
डीएम ने नरैनी एसडीएम को निर्देश दिया है कि वे तत्काल मौके पर जाएं और
व्यक्तिगत रूप से जांच करें। तत्काल आवश्यक कार्रवाई भी करें। डीएम ने कहा
कि इस घटना के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की
जाएगी।
शुक्रवार को मुकेरा पहुंचे आपूर्ति निरीक्षक मोहम्मद याकूब को
ग्रामीणों ने घेर लिया। उनसे सवालों की झड़ी लगा दी। कहा कि कालाबाजारी हो
रही है तो वे आंख क्यों मूंदें हैं?
उपभोक्ताओं के नाम की सूची
कोटे में चस्पा क्यों नहीं की गई? यह भी सवाल किया कि कोटेदार निरीक्षक की
मौजूदगी में मनमानी कर रहा था। फिर भी निरीक्षक क्यों खामोश रहे? वरना लोग
उग्र न होते। ग्रामीणों के तेवर देखकर आपूर्ति निरीक्षक खिसक लिए।
शुक्रवार
को मुकेरा गांव में अफसर भले ही न पहुंचे हों पर सामाजिक संगठनों के लोगों
ने पहुंचकर जायजा लिया। ग्रामीणों ने बताया कि कोटेदार कई माह से उन्हें
राशन, तेल, चीनी नहीं दे रहा। कालाबाजारी कर रहा है।
सहमे
ग्रामीणों ने राशन लुटने की तो बात कही पर यह नहीं बता सके कि यह किसने
किया? बुंदेलखंड किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रवण कुमार शर्मा और
विद्याधाम समिति के राजाभइया शुक्रवार को मुकेरा गांव पहुंचे। ग्रामीणों से
बातचीत की।
ग्रामीणों ने उन्हें जानकारियां दीं। ददुआ और रामकली
ने बताया कि कोटेदार ने उनसे रुपये तो पूरे ले लिए, लेकिन अनाज आधा दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि कोटेदार लंबे समय से कार्डधारकों को लूट रहा है। तब
किसी ने कोई तवज्जो नहीं दी।
अब अगर किसी भूखे ने अपना हक ले लिया
तो हायतौबा मची है। दोनों समाजसेवियों ने बताया कि राशन न मिलने से ही
लोगों का गुस्सा फूटा और उन्होंने पहले सड़क में जाम लगाया। अगर अधिकारी
इसे गंभीरता से ले लेते तो यह नौबत न आती।