इसी हफ्ते बुंदेलखंड आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना के शिलान्यास की खबरों से यह मुद्दा फिर गरमा गया है। वैसे तो बुंदेलखंड के तमाम संगठन इसका विरोध वर्ष 2005 से ही कर रहे हैं। केंद्र सरकार के अधिकारियों द्वारा इस योजना के लिए अधिग्रहीत करने वाले गांवों
में जनसुनवाई की थी। इस पर ग्रामीणों ने भी इसका खुलकर विरोध किया था। हकीकत यह है कि इस क्षेत्र के ग्रामीणों को अब तक यह पता ही नहीं है कि योजना क्या है? ऐसे में इस योजना से भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलने की बातें बेमानी है। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने इस योजना पर तेजी ला दी है। वह
इस पर काफी दिलचस्पी ले रही हैं। इसलिए इसी माह यहां आ रहे पीएम नरेंद्र मोदी से योजना का शिलान्यास कराया जा सकता है। हालांकि बताते हैं कि पर्यावरण मंत्रालय से अभी औपचारिकता बाकी है लेकिन प्रधानमंत्री के हाथों शिलान्यास तय हो जाता है तो सारे मंत्रालय रातों रात फाइल कंप्लीट कर देंगे। दूसरी तरफ इसका विरोध करने वाले संगठन फिर सक्रिय हो जाएंगे।