बांदा/पैलानी। मध्य प्रदेश में बारिश से गंगऊ बांध से लगातार पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। इससे केन नदी फिर उफना गई। 10 सेंटीमीटर की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। उधर, यमुना भी उफान पर है। खतरे का निशान महज ढाई मीटर दूर है। दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने से 10 से ज्यादा गांवों का संपर्क कट गया है। ग्रामीण नाव के सहारे आ-जा रहे हैं। उधर, बाढ़ को लेकर प्रशासन ने पहले जरूर सक्रियता दिखाई थी लेकिन इधर, कुछ होमगार्डों को लगाकर पल्ला झाड़ लिया है।
केन नदी में गंगऊ बांध से मंगलवार को 22 हजार क्यूसिक मीटर पानी डिस्चार्ज किया गया था। इससे बुधवार सुबह 10 बजे केन का जलस्तर बढ़कर 97.10 मीटर पर पहुंच गया था। बुधवार दोपहर 12 बजे गंगऊ बांध से 111225 क्यूसिक मीटर पानी छोड़ा गया। इससे दोपहर तक केन नदी 97.19 मीटर पर पहुंच गई। दोपहर दो बजे 124100 क्यूसिक मीटर पानी फिर छोड़ा गया। इससे केन नदी का जलस्तर बढ़ने की रफ्तार भी बढ़ गई। यह 97.37 मीटर में पहुंच गया। हालांकि यहां खतरे का निशान 104 मीटर पर है।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक अभी केन नदी में करीब दस सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। रात तक यह 100 के ऊपर पहुंच सकता है। केन में जल स्तर बढ़ने से पैलानी में खप्टिहाकलां के छनिहा डेरा, सेमरा डेरा, शिवपाल डेरा, शिवरामपुर में आवागमन बंद हो गया है। धोवर नाला के कट जाने से और उसमें पानी भर जाने से आवागमन प्रभावित हुआ है। उधर, केन नदी की बाढ़ से सिंधन कला-तुर्री नाला का रपटा डूब गया है। दस फीट ऊंचा पानी बह रहा है। इससे इस मार्ग में पडऩे वाले करीब छह गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ है। इसी प्रकार नांदादेव-पडोहरा में भी रास्ता बंद होने की वजह से लोग नाव के जरिए आवागमन कर रहे हैं। तहसील प्रशासन की ओर से सिर्फ मौके पर कुछ होमगार्ड जवानों को भेजकर औपचारिकता की जा रही है। डीएम के निर्देश के बावजूद एसडीएम व तहसीलदार मौके पर नहीं पहुंचे।
खप्टिहा कलांं कस्बे में दो बड़ी नावों को लगाया गया है। इसी से लोग दिन में कई चक्कर सफर करते हैं। नाविक शंकर निषाद तथा भूरा निषाद ने बताया कि केन नदी का पानी धीमी गति से बढ़ रहा है। केन नदी किनारे के खेतों की ओर बढ़ रहा है। यदि खरीफ की फसलें डूबीं तो किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएंगे। बची-खुची फसलें भी तबाह हो जाएंगी।
उधर, यमुना नदी में भी कल से लगातार जला स्तर बढ़ रहा है। बुधवार दोपहर 12 बजे चिल्ला में यमुना का जल स्तर 97.19 था। वहीं दो बजे तक यह 97.41 पहुंच गया। इस तरह यमुना भी दस सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा है। इससे इस क्षेत्र के तारा, खजुरी सहित की गांवों की तरफ पानी बढ़ने लगा है। यमुना यदि खतरे के निशान 100 मी पर पहुंचती है तो पैलानी व बबेरू तहसील के करीब 20 गांव प्रभावित होंगे।
बाढ़ चौकियां भगवान भरोसे, लेखपाल गायब
बाढ़ से निपटने के लिए जनपद में 43 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। सबसे ज्यादा 20 चौकियां पैलानी तहसील में है। केन और यमुना का जलस्तर फिर तेजी से बढ़ रहा है और गांवों की ओर पानी पहुंच रहा है। ऐसे में ग्रामीण चिंतित हैं। उधर, कई दिनों से बारिश भी हो रही है। बाढ़ चौकियों पर लेखपाल, होमगार्ड और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। 24 घंटे रहने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन मौजूदा समय में चौकियों पर होमगार्ड के अलावा कोई नहीं नजर आता। लेखपाल तो पहुंच ही नहीं रहे हैं।
दो माह पहले बना रपटा बहा
जसपुरा ब्लाॅक के झंझरी पुरवा गांव में दो माह पहले लघु सिंचाई विभाग की ओर से रपटा बनवाया गया था। मंगलवार की रात रपटा ध्वस्त हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार ने अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर रपटा निर्माण में घपला किया है। रपटा ध्वस्त होने से ग्रामीणों का आवागमन बंद हो गया है।
पैलानी क्षेत्र में बाढ़ चौकियों को अलर्ट किया गया है। केन व यमुना के बढ़ते जल स्तर पर तहसील प्रशासन की लगातार निगाह है। जिन गांवों में रपटा डूबने से आवागमन बंद है, वहां नाव लगाई गई हैं।-अंकित वर्मा, एसडीएम, पैलानी।