रक्षाबंधन के दूूसरे रविवार को पूरे जनपद में कजली मेले की धूम रही। सुबह से ही महिलाओं और बालिकाएं सज-संवरकर अपने सिर पर कजली के पौधे लेकर तालाबों की ओर चल पड़ीं। महिलाएं सावन गीत गाती रहीं। गंदगी और पानी कम होने से छाबी तालाब में कजली विसर्जन में असुविधा हुई।
तालाब के आसपास मेला लगा था। मेले में महिलाओं में श्रृंगार सामग्री की खरीद में ज्यादा दिलचस्पी ली। शाम को नवाब तालाब में भी कजली मेला लगा। यहां शहर के अलावा आसपास के गांवों से भी काफी लोग आए। गांवों में परंपरा के अनुसार महिलाओं ने ढोल की थाप के बीच कजलियां विसर्जित कीं। घरों में पकवान बनाए गए।
उधर कालिंजर के अथइया दाई मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई, जो बेला तालाब में कजलिया विसर्जन के साथ संपन्न हुई। यात्रा का शुभारंभ पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष महेंद्र सिंह वर्मा ने फीता काटकर किया। उन्होंने कहा कि इस मेले को वे शासन की मेला सूची में शामिल कराने का प्रयास करेंगे।
शोभायात्रा में आल्हा-ऊदल, मलखान सिंह, सैय्यद चाचा, बौना चोर, पृथ्वीराज सिंह, चंद्रावल का डोला आदि झांकियों ने लोगों को आकर्षित किया।
आयोजन समिति के प्रबंधक सूरज कुशवाहा व अध्यक्ष बंशू सोनकर समेत शंकर कुशवाहा, हजारीलाल कुशवाहा और ग्राम प्रधान वंदना दुबे ने व्यवस्था संभाली। मेला प्रभारी नायब तहसीलदार (नरैनी) व थानाध्यक्ष शिव सागर पांडेय पुलिस बल के साथ पूरे समय मौजूद रहे। शोभायात्रा के बाद एक-दूसरे को कजली भेंटकर गले मिलने की रस्म भी अदा की गई।