राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर संगठन ने एक्सईएन के व्यवहार के खिलाफ उन्हीं के कार्यालय के सामने धरना शुरू कर दिया है। साथ ही कोई भी काम न करने का एलान किया है। संगठन ने बिजली उपकरणाें व अन्य सामानों को घटिया बताते हुए इसकी कमेटी से जांच कराने की मांग की है। र्जेई संगठन के हड़ताल पर जाने से भीषण गर्मी के बीच लड़खड़ाई बिजली आपूर्ति व्यवस्था अब और गड़बड़ा सकती है।
जूनियर इंजीनियर संगठन 11 सूत्री मांगों को लेकर 17 मई से ही आंदोलन की राह पकड़े है। इसके ज्ञापन भी एक्सईएन को दिए हैं। सोमवार को संगठन के पदाधिकारी अपनी मांगों से संबंधित बातचीत के लिए अधिशासी अभियंता समरनाथ से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे।
संगठन के जनपदीय सचिव आरपी सिंह ने बताया कि अधिशासी अभियंता ने उनसे कोई बातचीत नहीं की। कहा कि चाहे काम बंद करें या जो चाहें करें वह किसी बिंदु पर बात नहीं करेंगे। सचिव ने बताया कि एक्सईएन के इस रवैए पर जूनियर इंजीनियर्स में रोष है।
संगठन की आपात बैठक मेें निर्णय के मुताबिक खंडीय कार्यालय में धरना शुरू कर दिया गया है। धरने के समय वे कोई विभागीय काम भी नहीं करेंगे। कहा कि विभाग के स्टोर में उपलब्ध मैटेरियल घटिया हैं। इससे आए दिन इंसुलेटर पंचर और तार टूटने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।
ऐसे में बिजली आपूर्ति पर व्यवधान उत्पन्न होता है। संगठन ने मांग की कि स्टोर के मैटेरियल इंसुलेटर, तार, ट्रांसफार्मर आदि की जांच कमेटी से कराई जाए। रिपेयर ट्रांसफार्मरों की गुणवत्ता भी जांची जाए। लाइनों का बीमा और उनकी मरम्मत के लिए बाहरी एजेंसी नियुक्त हो।
ओरन और तुलसी नगर सबस्टेशन में लाइनमैन स्टाफ उपलब्ध कराया जाए। राकेश सोनी, मुकेश चौरसिया, राजेश श्रीवास, मोहम्मद सिद्दीकी, रामपाल वर्मा, कांता प्रसाद, बीके शुक्ला, अफजल हुसैन, एसयू बेग आदि धरने में शामिल हुए। उधर, अधिशासी अभियंता समरजीत ने अपना फोन ही रिसीव नहीं किया। ऐसे में उनका पक्ष नहीं जाना जा सका।