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संथारा समाप्त करने के खिलाफ शांति मार्च किया

Mon, 24 Aug 2015 11:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
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सल्लेखना/संथारा धर्म साधना पर राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश को लेकर जैन धर्म अनुयायियों ने मौन जुलूस निकाला। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में धर्म साधना के उद्देश्य बताए गए। कहा कि अंतिम सांस तक धर्म साधना करना भारत के किसी भी कानून में निषिद्ध नहीं है। इस साधना को जीवन समाप्त करने, आत्महत्या करने का प्रयास या इच्छा मृत्यु की संज्ञा नहीं दी जा सकती।
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श्री 1008 मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी के नेतृत्व में सोमवार को छोटी बाजार स्थित दिगंबर मंदिर से बड़ी संख्या में जैन समुदाय ने मौन जुलूस निकाला। बलखंडी नाका, कटरा, केवटरा होकर कलेक्ट्रेट आए और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को दिया।

इसमें कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय का आदेश जैन धर्मावलंबियों की धर्म साधना पर गंभीर आघात है। सल्लेखना/संथारा एक धर्म साधना है। जैन धर्मावलंबी स्वयं पर अथवा किसी अन्य पर हिंसा नहीं करते। न हिंसा की भावना का जैन धर्म में कोई स्थान है।
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जैन साधक अपनी आत्मा की शुद्धि व कर्मों की निर्जरा के लिए साधना करता है। अनंत समय से स्थापित जैन धर्म एक वैज्ञानिक धर्म है। अनुयायियों ने जैन धर्मावलंबियों को संविधान में संरक्षित उनके मौलिक अधिकार से वंचित करने की कोई कार्रवाई न करने की मांग की।

इस अवसर पर कमेटी अध्यक्ष नरेंद्र कुमार जैन, महामंत्री सनत कुमार जैन, प्रबंधक शैलेंद्र कुमार जैन, नगर पालिका अध्यक्ष विनोद जैन, व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष मनोज जैन, राकेश जैन, प्रकाशचंद्र, पुष्पेंद्र कुमार, कैलाशचंद्र, दिलीप कुमार, सुरेशचंद्र, प्रमोद कुमार, सौरभ, आशीष जैन आदि मौजूद रहे।

उधर, जैन समुदाय के मौन जुलूस को कांग्रेस नेताओं ने भी समर्थन दिया। जिला कांग्रेस आरटीआई चेयरमैन वैश्य राजेश कुमार गुप्त (पप्पू) ने कहा कि जैन धर्म साधना के लिए कांग्रेसीजन पूरा साथ देंगे।
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