बांदा। चित्रकूट जिले में गेहूं और धान खरीद में हुए लाखों रुपये के घोटाले की जांच शासन के आदेश के बाद तेजी पकड़ ली है। इसके लिए प्रादेशिक कोआपरेटिव फेडरेशन के प्रबंध निदेशक ने प्रबंधक पीसीएफ, मुख्यालय को जांच अधिकारी नियुक्त कर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
प्रबंधक पीसीएफ इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं। उन्होंने संबंधित अभिलेख भी मंगा लिए हैं। हाल ही में इस मामले में चित्रकूट पीसीएफ प्रबंधक को निलंबित कर पीसीएफ मुख्यालय, लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया है।
चित्रकूट जिले में खरीद विपणन वर्ष-2021 में 5400 क्विंटल धान व 11,500 क्विंटल गेहूं केंद्रों से एफसीआई तक नहीं पहुंचा था। मामला उजागर होने पर इसकी जांच क्षेत्रीय प्रबंधक, पीसीएफ चित्रकूटधाम मंडल पुष्पेंद्र पुष्पेंद्र कुशवाहा ने की। जांच में मामला सही पाया गया।
जिस पर चित्रकूटधाम मंडल के उपायुक्त व उप निबंधक सहकारिता दीपक सिंह ने प्रबंध निदेशक पीसीएफ मासूम अली सरवर को पत्र लिखकर कार्रवाई की संस्तुति की थी। जिस पर दो दिन पहले प्रबंधक निदेशक ने चित्रकूट के जिला प्रबंधक पीसीएफ निर्मल कुमार को निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध किया है।
इस पूरे मामले की जांच पीसीएफ प्रबंधक, मुख्यालय प्रीति चौधरी को सौंपी है। उनसे 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। इस मामले में एक दर्जन से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई है।
खरीद से संबंधित अभिलेख भी मंगा लिए हैं। उधर, उपायुक्त व उप निबंधक सहकारिता दीपक सिंह ने बताया कि शासन स्तर से जांच शुरू है। इस मामले में जांच पूरी होने पर दूध का दूध और पानी का पानी सामने आएगा। घोटाले में शामिल कोई भी व्यक्ति बख्शा नहीं जाएगा।
प्रबंधक पर ये लगे आरोप
प्रबंध निदेशक, पीसीएफ ने अपने 4 पृष्ठीय निलंबन आदेश में व्यावसायिक कार्यों में शिथिलता, वित्तीय अनियमितता के 10 बिंदु का उल्लेख करते हुए चित्रकूट जिले के पीसीएफ प्रबंधक निर्मल कुमार को निलंबित किया था।
वित्तीय अनियमितताओं में वित्तीय वर्ष 2020-21 की कैशबुक दिनांक 6 अप्रैल 2020 को चेक नंबर 701523 द्वारा 24,935 रुपये का टीए एवं 15,000 का टैक्सी बिल भुगतान किया गया। परचेज एकाउंट से 27 लाख इंप्रेस्ट एकाउंट में ट्रांसफर किए गए और फर्टिलाइजर ट्रांसपोर्ट मद में भुगतान किया गया है।
कैश बुक 19 जून 2020 में धान/सीएमआर परिवहन का भुगतान संन्यासी राइस मिल को वर्ष 2019-20 का 10 लाख का किया गया, जबकि भारतीय खाद्य निगम से उक्त मद में कोई भुगतान प्राप्त नहीं हुआ और न ही बिल जमा किए गए।