बुंदेलखंड में बीते एक दशक के दौरान पौधरोपण पर खर्च हुए लगभग 80 करोड़ रुपये में घोटाले और धांधली की शिकायत और खबरों के बाद शासन ने जांच शुरू करा दीं है।
शुक्रवार को लखनऊ से आए वन विभाग के दो अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी। हालांकि उन्हाेंने कुछ भी बताने से यह इनकार कर दिया। कहा कि वह अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे।
सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर ने सितंबर में शासन से शिकायत की थी कि बुंदेलखंड के पौधरोपण में भारी घपला हुआ है। महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने भी अपनी रिपोर्ट में दर्शाया है।
शपथ पत्र के साथ दी शिकायत पत्र में कहा था कि साल 2008-09 में 10 करोड़ पौधरोपण पर 40.10 करोड़ रुपये खर्च दिखाए थे। बांदा में 2.92 करोड़, चित्रकूट में 5.70 करोड़, हमीरपुर में 5.80 करोड़, जालौन में 5.87 करोड़, झांसी में 8.11 करोड़ और ललितपुर में नौ करोड़ रुपये पौधरोपण में दर्शाए गए। इस शिकायत पर मुख्य वन संरक्षक ने चित्रकूट डीएफओ को इसकी जांच के आदेश दिए थे।
पौधरोपण में घपले की शिकायत की खबर प्रमुखता से प्रकाशित और प्रसारित हुई। 29 नवंबर को लखनऊ से आए पौधरोपण परियोजना के वरिष्ठ अधिकारी विभाष रंजन और इसी विभाग के प्रभाकर दुबे बांदा पहुंचे और जांच शुरू की।
यह दोनों अधिकारी महोबा में हुए पौधरोपण की भी जांच करेंगे। हालांकि जांच अधिकारियों ने मीडिया को कुछ भी बताने से परहेज किया। जांच कर रहे जांच अधिकारी प्रभाकर दुबे ने अमर उजाला से फोन पर कहा कि जांच बिल्कुल निष्पक्ष और सही होगी। वह इस बात का भरोसा दिलाते है। अपनी जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे।
लखनऊ से आए अधिकारियों द्वारा जांच शुरू कर देने की भनक मिलते ही वन विभाग ने अपने बचाव की कवायदे शुरू कर दी। जांच अधिकारियों को महोबा में भी गांधी उपवन और अन्य पौधरोपण वाले स्थलों की जांच करनी है।
शिकायतकर्ता आशीष ने बताया कि महोबा वन विभाग कर्मियों ने बीती रात रोडवेज परिसर में आनन फानन पौधे लगा दिए। यहां पूर्व में लगाए पौधों का नामोनिशान खत्म हो गया था। खड़ंजा उखाड़कर पौधे लगाए गए।
घोटाले के शिकायतकर्ता आशीष सागर दीक्षित का कहना है कि जांच में लीपापोती की भरपूर कोशिशें की जा रही हैं। जांच निष्पक्ष नहीं हुई और आरोपी दंडित नहीं हुए तो वह कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।